ધોરણ 10 | విષય: Hindi
'बिन्दू ! ओ बिन्दू ! ठहर, कहाँ जाता है?' → मालती
'सच बाबूजी, मेरे हाथ में झाड़ू थी और कूड़ा था।' → बिन्दू
'असली बात जानने का यह तरीका नहीं है।' → नंदन
'अरे, बोलता क्यों नहीं ? मुँह में जबान नहीं है ?' → नंदन
'अरे, वह तो नदीवाली कोठरी में पड़ा है।' → कुन्दन
बेइमान × ईमानदार
मालिक × नौकर / दास
असली × नकली
झूठ × सच
बच्चा → बचपन
मुस्कुराना → मुस्कुराहट
लड़का → लड़कपन
प्रसन्न → प्रसन्नता
बूढ़ा → बुढ़ापा
पागल → पागलपन
चोर → चोरी
(1) 'लातों के देव बातों से नहीं मानते हैं।'
आशय: इस कहावत का अर्थ है कि दुष्ट या हठी स्वभाव के लोग प्यार या समझाने से नहीं मानते, वे केवल कड़ाई या दंड की भाषा ही समझते हैं। मालती ने बिन्दू पर गुस्सा करते हुए यह बात कही थी।
(2) 'हम क्यों ऐसी चीजें खायें जो सबको नहीं मिलती, इसीसे तो चोरी की भावना को जन्म मिलता है।'
आशय: नंदन का मानना है कि समाज या घर में गैर-बराबरी ही अपराध का मुख्य कारण है। जब हम दूसरों के सामने ऐसी चीजें खाते हैं जो उन्हें नहीं मिलतीं, तो उनके मन में लालच आता है और वे चोरी करने पर मजबूर होते हैं। समानता और सौहार्द से चोरी की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।
योग्यता-विस्तार:
'मालती की ममता'
'चोरी' कहानी में मालती का चरित्र एक गृहिणी का है जो शुरुआत में कड़क और शक्की दिखाई देती है। बिन्दू द्वारा मेवा चुराए जाने पर वह बहुत गुस्सा होती है और उसे पुलिस में देने तक की बात करती है। लेकिन जब बिन्दू घर छोड़कर चला जाता है और शाम तक वापस नहीं लौटता, तब मालती के भीतर छिपी माँ की ममता जाग उठती है। वह बिन्दू के लिए चिंतित हो जाती है और खुद को कोसने लगती है। जब उसे पता चलता है कि बिन्दू नदीवाली कोठरी में भूखा-प्यासा पड़ा है, तो वह खुद जाकर उसे लाती है और बड़े प्यार से भोजन कराती है। इससे स्पष्ट होता है कि मालती का हृदय ऊपर से भले ही कठोर लगे, लेकिन अंदर से वह ममता और वात्सल्य से भरा हुआ है।