ધોરણ 10 | విષય: Hindi
तोते ने पेड़ से अपने अत्यधिक लगाव के निम्नलिखित कारण बतलाए:
इसी पेड़ पर तोते का जन्म हुआ था।
पेड़ की सुखद छाँव में उसने अपना होश संभाला था।
पेड़ ने ही उसे गाना, मुस्कुराना और उड़ना सिखाया था।
बचपन से लेकर अब तक पेड़ ही उसके सुख-दुख का सच्चा साथी रहा था।
इसलिए तोता संकट के समय अपने बचपन के साथी को छोड़कर जाना नहीं चाहता था, बल्कि उसके साथ रहकर दुख बाँटना चाहता था।
इन्द्र: हे पक्षी! इस विशाल हरे-भरे जंगल को छोड़कर तुम इस सूखे पेड़ पर क्यों रहते हो? क्या यह तुम्हारी मूर्खता नहीं है?
तोता: महाराज! यह पेड़ कभी पूरे जंगल में सबसे सुंदर, गौरवशाली और बलशाली था। मेरा जन्म इसी पर हुआ और इसने मुझे उड़ना-गाना सिखाया। अब शिकारी के विषैले बाण से यह सूख रहा है, तो मैं विपत्ति में इसे छोड़कर कैसे जा सकता हूँ?
इन्द्र (प्रसन्न होकर): तुम्हारी यह वफादारी देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। कोई भी वर माँग लो!
तोता: हे देव! मेरी बस यही इच्छा है कि आप इस सूखे तरुवर को फिर से हरा-भरा कर दें।
विस्तृत: भारत में विस्तृत और सुंदर प्राकृतिक जंगल पाए जाते हैं।
गौरवशाली: हमारे देश का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है।
मोदमयी: बचपन की मोदमयी यादें हमेशा मन को खुश कर देती हैं।
एवमस्तु: इन्द्रदेव ने तोते की प्रार्थना सुनकर कहा, "एवमस्तु!"
(1) जहाँ मनुष्य न हो → निर्जन
(2) जिसमें बल न हो → दुर्बल / निर्बल
(3) देवों के अधिपति → देवाधिपति / इन्द्र
(4) भू के पति → भूपति (राजा)