chapter 2

ધોરણ 10 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (D)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: बूढ़ी काकी गला फाड़-फाड़कर (चीख मार कर) बहुत ज़ोर से रोती थी।

સાચો જવાબ: बुद्धिराम के बड़े लड़के सुखराम के तिलक के उत्सव में पूड़ियाँ बन रही थीं।

સાચો જવાબ: बूढ़ी काकी को पूड़ियाँ छनने वाली भट्टी (कड़ाह) के पास बैठा देखकर रूपा क्रोधित हो गई।

સાચો જવાબ:

बूढ़ी काकी को अपने हिस्से की पूड़ियाँ खिलाने की खुशी के कारण लाडली को नींद नहीं आ रही थी।



સાચો જવાબ: उत्सव के दिन बूढ़ी काकी अपशकुन होने के डर से नहीं रो रही थी।

સાચો જવાબ: बुढ़ापे में बूढ़ी काकी की समस्त इच्छाओं का केंद्र उनकी स्वादेंद्रिय (जीभ का स्वाद) थी।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: जब घरवाले काकी की इच्छा के खिलाफ कोई काम करते, उनका भोजन का समय टल जाता, भोजन की मात्रा कम होती या बाज़ार से आई कोई चीज़ उन्हें नहीं मिलती, तब वे रोने लगती थीं।

સાચો જવાબ: लड़के बूढ़ी काकी को चिढ़ाते थे; कोई उन्हें चुटकी काटकर भाग जाता तो कोई उन पर पानी की कुल्ली कर देता था।

સાચો જવાબ: बूढ़ी काकी की कल्पना में लाल-लाल, फूली-फूली और नरम-नरम पूड़ियाँ नाचने लगीं और उन्हें कचौड़ियों से अजवाइन और इलायची की महक आने लगी।

સાચો જવાબ: रूपा ने रुँधे हुए गले से कहा— "काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई, उसका बुरा मत मानना और परमात्मा से प्रार्थना कर देना कि वे मेरा अपराध क्षमा कर दें।"

સાચો જવાબ: बुद्धिराम ने संपत्ति अपने नाम करवाते समय बूढ़ी काकी से खूब लंबे-चौड़े झूठे वादे (सब्जबाग दिखाए) किए थे और इस तरह उनकी सारी जायदाद अपने नाम लिखवा ली थी।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के चार-पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: रात के समय जब रूपा की आँख खुली, तो उसने देखा कि बूढ़ी काकी मेहमानों की जूठी पत्तलों से पूड़ियों के टुकड़े चुन-चुनकर खा रही हैं। यह हृदय विदारक दृश्य देखकर रूपा का दिल काँप उठा। उसे पश्चाताप हुआ क्योंकि जिस काकी की संपत्ति से उसके परिवार को हर साल दो सौ रुपए की आमदनी हो रही थी, उसी काकी को उत्सव के दिन भूखा रहना पड़ा और जूठन चाटनी पड़ी। रूपा को लगा कि इस महापाप और अधर्म की ज़िम्मेदार वही है।

સાચો જવાબ: जब तिलक के उत्सव के दिन भूख से व्याकुल होकर काकी रेंगती हुई कड़ाह के पास आ बैठीं, तब रूपा ने उन पर बहुत गुस्सा किया और उन्हें डाँटा। इसके बाद जब काकी दोबारा रेंगती हुई मेहमानों के बीच पहुँच गईं, तब बुद्धिराम ने आपे से बाहर होकर काकी के दोनों हाथ पकड़े और उन्हें घसीटते हुए अँधेरी कोठरी में ले जाकर ज़ोर से पटक दिया। उन्होंने ऐसा काकी की केवल भोजन पाने की व्याकुलता को उनकी 'निर्लज्जता' मानकर दंड देने के लिए किया।

સાચો જવાબ: बूढ़ी काकी को लगा कि मेहमान खाकर चले गए हैं, इसलिए वे खाने के लिए उत्सुक हो गईं। उन्होंने मन में मंसूबे बाँधे कि वे पहले सब्ज़ी से पूड़ियाँ खाएँगी, फिर दही और शक्कर के साथ खाएँगी। कचौड़ियाँ वे रायते के साथ मज़े से खाएँगी। उन्होंने यह भी सोचा कि चाहे कोई उन्हें बुरा कहे या भला, वे तो आज माँग-माँगकर भरपेट खाएँगी।

સાચો જવાબ: लेखक का मानना है कि बुढ़ापे में मनुष्य के हाथ-पैर और अन्य इंद्रियाँ काम करना बंद कर देती हैं। जीवन की बाकी सभी इच्छाएँ और चेष्टाएँ समाप्त हो जाती हैं, लेकिन स्वाद या भोजन की इच्छा (तृष्णा) अंत तक बनी रहती है। वृद्ध व्यक्ति की सारी इच्छाएँ भोजन के एक ही केंद्र पर आकर टिक जाती हैं। बूढ़ी काकी के मामले में भी ऐसा ही था, जहाँ भूख और स्वाद की तृष्णा के कारण वे अपना उचित-अनुचित का विवेक भी भूल गईं।
5. आशय स्पष्ट कीजिए :

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि वृद्ध होने पर मनुष्य का व्यवहार और उसकी ज़रूरतें बिल्कुल बच्चों जैसी हो जाती हैं। जैसे छोटे बच्चे अपनी बात मनवाने या कष्ट होने पर रोने लगते हैं और उन्हें बस खाने-खेलने की इच्छा होती है, वैसे ही बूढ़े लोग भी पराश्रित (दूसरों पर निर्भर) हो जाते हैं। बूढ़ी काकी भी बच्चों की तरह केवल अपने भोजन के लिए रोती थीं और लाडली के हाथ से पूड़ियाँ पाकर बच्चों की तरह अपना सारा दुख-दर्द भूल गईं।

સાચો જવાબ: बच्चे स्वभाव से चंचल होते हैं और उन्हें बूढ़ों की कमियाँ या उनका रोना एक खेल जैसा लगता है। जब बच्चे अपने माता-पिता को भी बूढ़ों का अनादर या उपेक्षा करते देखते हैं, तो उनका साहस और बढ़ जाता है। इसी कारण घर के बच्चे बूढ़ी काकी को चुटकी काटकर या उन पर पानी फेंककर सताते थे, क्योंकि बूढ़ों और बच्चों की सोच में एक स्वाभाविक अंतर या दूरी होती है।
6. सूचनानुसार उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ:


  • दीनता: लाचारी, दरिद्रता, कंगाली




  • वाटिका: बाग, उपवन, बगीचा




સાચો જવાબ:


  • प्रतिकूल × अनुकूल




  • सज्जन × दुर्जन




  • अनुराग × विराग / द्वेष




  • सुलभ × दुर्लभ




  • अपशकुन × शकुन




  • दीर्घाहार × अल्पाहार




  • निर्लज्जता × लज्जाशीलता / शालीनता




  • अपरिमित × परिमित




સાચો જવાબ:


  • जहाँ घटना बनी है वह जगह: घटनास्थल




  • जीभ का स्वाद: स्वादेंद्रिय




  • भूख से आतुर: क्षुधातुर




  • धीरज की परीक्षा लेनेवाली: धैर्यपरीक्षक




સાચો જવાબ:


  • सब्जबाग दिखाना — झूठी आशाएँ या दिलासा देना।





    • वाक्य-प्रयोग: बुद्धिराम ने काकी को सब्जबाग दिखाकर उनकी सारी संपत्ति अपने नाम कर ली।






  • आपे से बाहर होना — बहुत अधिक क्रोधित होना।





    • वाक्य-प्रयोग: बूढ़ी काकी को मेहमानों के बीच देखकर बुद्धिराम आपे से बाहर हो गया।






  • उबल पड़ना — अचानक बहुत गुस्सा होना।





    • वाक्य-प्रयोग: चूल्हे के पास काकी को बैठा देखकर रूपा उन पर उबल पड़ी।






  • छाती पर सवार होना — सामने अड़े रहना या परेशान करना।





    • वाक्य-प्रयोग: उधार देने वाले सुबह-सुबह ही साहूकार की छाती पर सवार हो गए।






  • नाक कटवाना — इज़्ज़त गँवाना / बदनामी कराना।





    • वाक्य-प्रयोग: मेहमानों के बीच रेंगकर काकी ने जैसे बुद्धिराम की नाक ही कटवा दी।






  • बेसिर-पैर की बात — बिना सोचे-समझे या बिना मतलब की बात करना।





    • वाक्य-प्रयोग: रामू की बातों का कोई अर्थ नहीं होता, वह हमेशा बेसिर-पैर की बातें करता है।






  • हृदय सन्न रह जाना — गहरा धक्का लगना या स्तब्ध रह जाना।





    • वाक्य-प्रयोग: काकी को जूठी पत्तल चाटते देखकर रूपा का हृदय सन्न रह गया।






  • मुँह बाए फिरना — हर समय पाने की लालसा में रहना या भटकना।





    • वाक्य-प्रयोग: लालची लोग पैसों के लिए हर जगह मुँह बाए फिरते हैं।






  • कलेजे में हूक-सी उठना — मन में तीव्र दुःख या वेदना होना।





    • वाक्य-प्रयोग: गरीब बच्चे को भूखा देखकर माँ के कालेजे में हूक-सी उठी।






  • रोटियों के लाले पड़ना — दाने-दाने को तरसना या बहुत गरीबी होना।





    • वाक्य-प्रयोग: संपत्ति सौंपने के बाद बूढ़ी काकी को रोटियों के लाले पड़ गए।






  • आग हो जाना — बहुत गुस्सा होना।





    • वाक्य-प्रयोग: गृहकार्य न करने पर शिक्षक छात्र पर आग हो गए।






  • जवाब दे चुकना — शक्ति समाप्त हो जाना या अंत होना।





    • वाक्य-प्रयोग: बुढ़ापे के कारण बूढ़ी काकी के हाथ-पैर जवाब दे चुके थे।






  • कलेजा पसीजना — मन में दया उत्पन्न होना।





    • वाक्य-प्रयोग: भिखारी की हालत देखकर अमीर सेठ का कलेजा पसीज गया।






સાચો જવાબ:


  • परमानंद = परम + आनंद




  • परमात्मा = परम + आत्मा




  • अर्धांगिनी = अर्ध + अंगिनी




  • स्वार्थानुकूलता = स्वार्थ + अनुकूलता




  • सहानुभूति = सह + अनुभूति




  • रसास्वादन = रस + आस्वादन




  • व्याकुल = वि + आकुल




  • दीर्घाहार = दीर्घ + आहार




  • प्रतीक्षा = प्रति + ईक्षा




  • कण्ठावरुद्ध = कण्ठ + अवरुद्ध




  • क्षुधातुर = क्षुधा + आतुर




  • कालान्तर = काल + अन्तर




  • रक्षागार = रक्षा + आगार




  • सज्जन = सत् + जन




  • सदिच्छाएँ = सत् + इच्छाएँ




  • पुनरागमन = पुनः + आगमन




  • दुर्गति = दुः + गति




  • सम्मुख = सम् + मुख




સાચો જવાબ:


  • क्षुधातुर = क्षुधा (भूख) से आतुर — तत्पुरुष समास




  • सदिच्छाएँ = सत् (अच्छी) हैं जो इच्छाएँ — कर्मधारय समास




  • क्षुधावर्धक = क्षुधा को बढ़ाने वाला — तत्पुरुष समास




  • रसास्वादन = रस का आस्वादन — तत्पुरुष समास














 
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