ધોરણ 10 | విષય: Hindi
बूढ़ी काकी को अपने हिस्से की पूड़ियाँ खिलाने की खुशी के कारण लाडली को नींद नहीं आ रही थी।
दीनता: लाचारी, दरिद्रता, कंगाली
वाटिका: बाग, उपवन, बगीचा
प्रतिकूल × अनुकूल
सज्जन × दुर्जन
अनुराग × विराग / द्वेष
सुलभ × दुर्लभ
अपशकुन × शकुन
दीर्घाहार × अल्पाहार
निर्लज्जता × लज्जाशीलता / शालीनता
अपरिमित × परिमित
जहाँ घटना बनी है वह जगह: घटनास्थल
जीभ का स्वाद: स्वादेंद्रिय
भूख से आतुर: क्षुधातुर
धीरज की परीक्षा लेनेवाली: धैर्यपरीक्षक
सब्जबाग दिखाना — झूठी आशाएँ या दिलासा देना।
वाक्य-प्रयोग: बुद्धिराम ने काकी को सब्जबाग दिखाकर उनकी सारी संपत्ति अपने नाम कर ली।
आपे से बाहर होना — बहुत अधिक क्रोधित होना।
वाक्य-प्रयोग: बूढ़ी काकी को मेहमानों के बीच देखकर बुद्धिराम आपे से बाहर हो गया।
उबल पड़ना — अचानक बहुत गुस्सा होना।
वाक्य-प्रयोग: चूल्हे के पास काकी को बैठा देखकर रूपा उन पर उबल पड़ी।
छाती पर सवार होना — सामने अड़े रहना या परेशान करना।
वाक्य-प्रयोग: उधार देने वाले सुबह-सुबह ही साहूकार की छाती पर सवार हो गए।
नाक कटवाना — इज़्ज़त गँवाना / बदनामी कराना।
वाक्य-प्रयोग: मेहमानों के बीच रेंगकर काकी ने जैसे बुद्धिराम की नाक ही कटवा दी।
बेसिर-पैर की बात — बिना सोचे-समझे या बिना मतलब की बात करना।
वाक्य-प्रयोग: रामू की बातों का कोई अर्थ नहीं होता, वह हमेशा बेसिर-पैर की बातें करता है।
हृदय सन्न रह जाना — गहरा धक्का लगना या स्तब्ध रह जाना।
वाक्य-प्रयोग: काकी को जूठी पत्तल चाटते देखकर रूपा का हृदय सन्न रह गया।
मुँह बाए फिरना — हर समय पाने की लालसा में रहना या भटकना।
वाक्य-प्रयोग: लालची लोग पैसों के लिए हर जगह मुँह बाए फिरते हैं।
कलेजे में हूक-सी उठना — मन में तीव्र दुःख या वेदना होना।
वाक्य-प्रयोग: गरीब बच्चे को भूखा देखकर माँ के कालेजे में हूक-सी उठी।
रोटियों के लाले पड़ना — दाने-दाने को तरसना या बहुत गरीबी होना।
वाक्य-प्रयोग: संपत्ति सौंपने के बाद बूढ़ी काकी को रोटियों के लाले पड़ गए।
आग हो जाना — बहुत गुस्सा होना।
वाक्य-प्रयोग: गृहकार्य न करने पर शिक्षक छात्र पर आग हो गए।
जवाब दे चुकना — शक्ति समाप्त हो जाना या अंत होना।
वाक्य-प्रयोग: बुढ़ापे के कारण बूढ़ी काकी के हाथ-पैर जवाब दे चुके थे।
कलेजा पसीजना — मन में दया उत्पन्न होना।
वाक्य-प्रयोग: भिखारी की हालत देखकर अमीर सेठ का कलेजा पसीज गया।
परमानंद = परम + आनंद
परमात्मा = परम + आत्मा
अर्धांगिनी = अर्ध + अंगिनी
स्वार्थानुकूलता = स्वार्थ + अनुकूलता
सहानुभूति = सह + अनुभूति
रसास्वादन = रस + आस्वादन
व्याकुल = वि + आकुल
दीर्घाहार = दीर्घ + आहार
प्रतीक्षा = प्रति + ईक्षा
कण्ठावरुद्ध = कण्ठ + अवरुद्ध
क्षुधातुर = क्षुधा + आतुर
कालान्तर = काल + अन्तर
रक्षागार = रक्षा + आगार
सज्जन = सत् + जन
सदिच्छाएँ = सत् + इच्छाएँ
पुनरागमन = पुनः + आगमन
दुर्गति = दुः + गति
सम्मुख = सम् + मुख
क्षुधातुर = क्षुधा (भूख) से आतुर — तत्पुरुष समास
सदिच्छाएँ = सत् (अच्छी) हैं जो इच्छाएँ — कर्मधारय समास
क्षुधावर्धक = क्षुधा को बढ़ाने वाला — तत्पुरुष समास
रसास्वादन = रस का आस्वादन — तत्पुरुष समास