ધોરણ 10 | విષય: Hindi
पंक्तियाँ:
जब भी
भूख से लड़ने
कोई खड़ा हो जाता है
सुन्दर दीखने लगता है
भावार्थ:
इन पंक्तियों के माध्यम से कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सौंदर्य की पारंपरिक परिभाषा को बदलते हैं। कवि कहते हैं कि सौंदर्य केवल शारीरिक बनावट या बाहरी रूप-रंग में नहीं होता, बल्कि जीवन के अस्तित्व की रक्षा और भूख मिटाने के संघर्ष में होता है।
चाहे कोई पशु हो, पक्षी हो या फिर मनुष्य—जब भी वह अपनी भूख और अभावों से मुकाबला करने के लिए सीना तानकर खड़ा होता है, तो उसकी यही संघर्षशीलता और जिजीविषा उसे बेहद सुंदर, प्रभावशाली और गरिमामय बना देती है।