સાચો જવાબ:
कवि श्रीकृष्ण की लाठी (लकुटी) और कंबल (कामरिया) पाने की अभिलाषा करते हैं। इसके लिए वे तीनों लोकों का राज्य भी छोड़ने को तैयार हैं। वे नंद की गायों को चराने के बदले आकाश और पाताल की आठों सिद्धियों और नौ निधियों का सुख भूलने को तैयार हैं। साथ ही, ब्रज के वन, बाग और कँटीली झाड़ियों (करील के कुंजों) के दर्शन के लिए वे सोने के करोड़ों महलों (कलधौत के धाम) को न्योछावर करने की इच्छा रखते हैं।