chapter 4

ધોરણ 10 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (D)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: लेखक को यह खब्त (धुन) है कि जब भी वे किसी अनुभवी विदेशी मित्र से मिलते हैं, तो उनसे पूछते हैं कि इतने बड़े पुरुषों और आंदोलनों के बावजूद हमारा देश उन्नति क्यों नहीं कर रहा है।

સાચો જવાબ: लोगों में उदारता की कमी के कारण, जब घर के बड़े या पिता अंत तक अपने पुत्रों को घर का काम और हुनर नहीं सिखाते, तब कुटुंब व्यवस्था नष्ट हो जाती है।

સાચો જવાબ: हम अपने देश के बड़े-बड़े महान नेताओं और पुरुषों की जय जयकार करते हैं।

સાચો જવાબ: जो नागरिक अपने निर्धारित कर्तव्य और छोटे-से-छोटे कार्य को पूरी ईमानदारी, निष्ठा और लगन से ठीक प्रकार से करता है, वही सच्चा देशभक्त है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: जब देश का प्रत्येक व्यक्ति—चाहे वह धोबी, दर्जी, किसान, मजदूर या शिक्षक हो—यह अनुभव करने लगे कि अपने कर्तव्य को ठीक से करना ही देशभक्ति है, और अपने काम को लगन से करने लगे, तब देश में एकदम जागृति आ जाएगी।

સાચો જવાબ: मनुष्य समाज को संगठित करने के लिए हमें सबसे पहले अपने व्यक्तिगत जीवन को अनुशासित और संगठित करना होगा। जब देश का हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तो मनुष्य समाज स्वतः ही संगठित हो जाएगा।

સાચો જવાબ: इस कथन का आशय यह है कि हमारे देश में लोग दूसरों को आगे बढ़ाने में संकोच करते हैं और खुद को ही आगे रखना चाहते हैं। वे गुणी नवयुवकों को अपनी योग्यता दिखाने का अवसर नहीं देते और न ही अपना हुनर या विद्या दूसरों को सिखाते हैं।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के सविस्तार उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: वृद्ध ईसाई पादरी ने कहा कि भारतीय लोग अपने काम में गर्व नहीं लेते। उन्होंने विस्तार से समझाया कि यहाँ लोग नौकरी पाने के लिए तो बहुत विनम्रता से प्रार्थना-पत्र देते हैं, लेकिन नौकरी मिलते ही वे अपने काम को हीन समझने लगते हैं। वे दूसरों के साथ मिलकर काम बिगाड़ने और मालिक को परेशान करने का षड्यंत्र रचने लगते हैं। इसके विपरीत, विदेशों में लोग नौकरी मिलने पर अपने काम को इतनी निष्ठा से करते हैं जैसे संसार की गति उन्हीं के काम पर निर्भर हो।

સાચો જવાબ:

वृद्ध आई.सी.एस. अधिकारी ने कहा कि भारतीय लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते और तात्कालिक सुविधा देखते हैं। उन्होंने निम्नलिखित उदाहरण दिए:






  • दावत में न मेजबान को और न मेहमान को एक-दूसरे के समय पर आने का भरोसा होता है।




  • धोबी, दर्जी और गृहस्थ को एक-दूसरे पर समय से काम करने या दाम देने का विश्वास नहीं होता।




  • सड़क या रेल में चलने वाले मुसाफिर दूसरों की सुविधा का ध्यान नहीं रखते और व्यर्थ शोर मचाते हैं।




  • लोग सड़क पर चलते समय केले का छिलका या पिन ऐसे ही फेंक देते हैं, जिससे दूसरों को चोट लग सकती है।




સાચો જવાબ: देश की 40 वर्षों तक सेवा करने वाली प्रसिद्ध वृद्धा स्त्री ने उत्तर दिया कि भारतीयों में उदारता की कमी है। वे योग्य और गुणी नवयुवकों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं देते। पिता भी अंत समय तक पुत्र को घर का काम-काज या हुनर नहीं सिखाता। इसी अनुदारता और आपसी प्रतिद्वंद्विता के कारण देश के कई गुणी लोग अपनी विद्या अपने साथ ही लेकर मर गए, जिससे हमारे कई प्राचीन वैज्ञानिक आविष्कार और बहुमूल्य औषधियाँ हमेशा के लिए लुप्त हो गईं।

સાચો જવાબ: देश को ऐसे कर्मठ और जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता है जो केवल भाषण देने में विश्वास न रखकर अपने छोटे-से-छोटा कार्य को पूरी ईमानदारी, लगन और निष्ठा के साथ करें। देश को किसी बाहरी वस्तु की नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की ज़रूरत है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब नागरिकों का व्यक्तिगत जीवन संगठित और अनुशासित होगा, तभी पूरा देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकेगा और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएगा।
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