chapter 5

ધોરણ 10 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: मीराबाई श्रीकृष्ण (गिरधर गोपाल) की भक्ति करती थीं।

સાચો જવાબ: मीराबाई को 'राम नाम' रूपी रत्न का अनमोल धन मिल गया है।

સાચો જવાબ:

पैरों में घुँघरू देखकर मीरा की सास ने उन्हें 'कुलनासी' (कुल का नाश करने वाली) कहा।



સાચો જવાબ: मीरा को विष का प्याला राणा (राणा सांगा के परिवार के राजा) ने भेजा था।

સાચો જવાબ: अपने सत्गुरु की अपार कृपा से मीरा ने 'राम रतन धन' पाया है।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: गिरधर गोपाल की भक्ति में लीन होकर मीराबाई ने अपने भाई, भाई-बंधु और सगे-संबंधियों का त्याग कर दिया। उन्होंने साधु-संतों के साथ बैठकर संसार की लोक-लाज और सामाजिक बंधनों को भी छोड़ दिया।

સાચો જવાબ: मीरा के 'राम रतन धन' की यह विशेषता है कि यह खर्च करने पर भी कम नहीं होता, इसे कोई चोर चुरा नहीं सकता और यह धन दिन-प्रतिदिन सवाया (ज़्यादा) बढ़ता ही जाता है।

સાચો જવાબ: मीरा सत्य की नाव पर बैठकर इस भवसागर को पार करना चाहती हैं, जिसके नाविक (खेवटिया) स्वयं उनके सत्गुरु हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही वे संसार रूपी सागर को आसानी से पार कर रही हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: मीराबाई की कृष्ण-भक्ति उनके राजपरिवार को पसंद नहीं थी। जब मीरा लोक-लाज छोड़कर साधुओं के साथ बैठने लगीं, तो राजपरिवार ने इसे कुल का अपमान समझा। इस भक्ति के मार्ग में सबसे बड़ा संकट तब आया जब राणा ने मीरा को मारने के लिए विष (जहर) का प्याला भेजा। लेकिन मीरा श्रीकृष्ण के प्रेम में इतनी मग्न थीं कि उन्होंने हँसते-हँसते उस ज़हर को पी लिया। कृष्ण की कृपा से वह विष भी अमृत बन गया और मीरा को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस प्रकार वे अपने अटूट विश्वास से संकट से पार हो गईं।

સાચો જવાબ: मीराबाई के पदों में सत्गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। मीरा कहती हैं कि सत्गुरु ने ही उन पर कृपा करके राम नाम रूपी अमूल्य वस्तु प्रदान की है, जिसे पाकर उनका जीवन धन्य हो गया। गुरु की दी हुई इस नाम-रूपी पूँजी के कारण ही वे जनम-जनम के बंधनों से मुक्त हो पाई हैं। गुरु ही वह कुशल नाविक (खेवटिया) हैं जो सत्य की नाव के सहारे इस कठिन संसार रूपी सागर (भवसागर) को पार कराते हैं। गुरु के बिना ईश्वर की सच्ची भक्ति और मोक्ष पाना असंभव है।

સાચો જવાબ: कृष्ण भक्ति में पूरी तरह डूबकर जब मीरा पैरों में घुँघरू बाँधकर नाचने लगीं और महल छोड़कर साधु-संतों के साथ बैठने लगीं, तो समाज और परिवार उनके खिलाफ हो गया। आम लोग मीरा को 'बावरी' यानी पागल कहने लगे क्योंकि वे राजसी ठाट-बाट छोड़कर वैरागियों की तरह रहती थीं। वहीं दूसरी ओर, मीरा की सास और राजपरिवार के लोग उन्हें 'कुलनासी' कहते थे क्योंकि उनका मानना था कि एक राजवधू का सरेआम नाचना और घूमना उनके कुल की प्रतिष्ठा और मर्यादा को नष्ट कर रहा था।

સાચો જવાબ:

4. उचित जोड़े बनाइए :



यहाँ 'अ' और 'ब' के सही मिलान (जोड़े) दिए गए हैं:
























'अ' 'ब' (सही उत्तर)
(1) भगत देख राजी हुई (2) जगत देखि रोई ।
(2) मीरा के प्रभु गिरधरनागर (3) हरखि हरखि जस गायो ।
(3) वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु (1) किरपा कर अपणायो ।

5. आशय स्पष्ट कीजिए :

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि मीराबाई ने अपने सत्गुरु के माध्यम से राम-नाम की जो भक्ति प्राप्त की है, वह उनके लिए अनेक जन्मों की अनमोल संपत्ति (पूँजी) की तरह है। इस आध्यात्मिक धन को पाने के लिए उन्होंने संसार के सभी भौतिक सुखों, राजसी वैभव और सगे-संबंधियों (लौकिक बंधनों) को हमेशा के लिए खो दिया या त्याग दिया है।

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि यह संसार एक अत्यंत कठिन और विशाल सागर की तरह है, जिसे पार करना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस सागर को पार करने के लिए मीरा के पास 'सत्य' रूपी मज़बूत नाव है और उस नाव को चलाने वाले (खेवटिया) स्वयं उनके परम ज्ञानी सत्गुरु हैं। गुरु के सच्चे मार्गदर्शन के कारण ही मीरा इस संसार के दुखों और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति कर रही हैं।
```php
Warning: session_start(): Session cannot be started after headers have already been sent in /home/u367000040/domains/gyanistudent.in/public_html/footer.php on line 8
```