ધોરણ 10 | విષય: Sanskrit
(1) आगन्तुम् : हेत्वर्थ कृदन्त
(2) अतिक्रम्य : सम्बन्धक भूतकृदन्त
(3) पतिताः : कर्मणि भूतकृदन्त
(4) करणीયાઃ : विध्यर्थ कृदन्त
(5) बाधिता : कर्मणि भूतकृदन्त
(1) शिष्यः + अपृच्छत् = शिष्योऽपृच्छत्
(2) पतितः + जनः = पतितो जनः
(3) अतः + तत्र = अतस्तत्र
(4) प्रगतिः + तेષામ્ = प्रगतिस्तेषाम्
(5) गुरुઃ + अग્રે = गुरुरग्रे
(1) ભારાધિક્યેન : षष्ठी तत्पुरुष समास (भारस्य आधिक्यम्, तेन)
(2) આહારનિદ્રાભયાદયઃ : बहुव्रीहि समास (आहारश्च निद्रा च भयं च, आहारादयઃ)
(3) સંસારસમુદ્રમ્ : कर्मधारय समास (संसार एव समुद्रः)
(4) સુખપૂર્ણમ્ : तृतीया तत्पुरुष समास (सुખેન પૂર્ણમ્)
| धातु | पद | काल | पुरुष | वचन |
|---|---|---|---|---|
| (1) भ्रमन्ति | भ्रम् | परस्मैपद | वर्तमानकाल (लँट्) | अन्य पुरुष |
| (2) अपृच्छत् | प्रच्छ् | परस्मैपद | ह्यस्तन भूतकाल (लँङ्) | अन्य पुरुष |
| (3) भवेयुः | भू | परस्मैपद | विध्यर्थ (लिँङ्) | अन्य पुरुष |
| (4) भवामः | भू | परस्मैपद | वर्तमानकाल (लँट्) | उत्तम पुरुष |
| शब्द | मूल शब्द | लिङ्ग | विभक्ति | वचन |
|---|---|---|---|---|
| (1) प्रवाहेण | प्रवाह | पुँल्लिङ्ग | तृतीया | एकवचन |
| (2) अस्माकम् | अस्मद् | सर्वनाम | षष्ठी | बहुवचन |
| (3) तीरेषु | तीर | नपुंसकलिङ्ग/पुँल्लिङ्ग | सप्तमी | बहुवचन |
| (4) व्यवहारान् | व्यवहार | पुँल्लिङ्ग | द्वितीया | बहुवचन |
| (5) परिवारात् | परिवार | पुँल्लिङ्ग | पञ्चमी | एकवचन |
કાષ્ઠખંડને સમુદ્ર સુધી જવામાં આ ચાર વિઘ્નો આવી શકે છે:
કિનારા પર ચોંટી જવું (તીરે સંલગ્નતા).
વજન વધી જવાથી પાણીમાં ડૂબી જવું (ભારાધિક્યેન જલે નિમગ્નતા).
પાણીના વમળમાં ફસાઈ જવું (આવર્તપાતતા).
નદીના પાણીથી છૂટા પડી જવું (નદીજલવિયોગ).
(1) आवर्तपातता → (3) व्यसनेषु सततं पतनम्
(2) तीरे संलग्नता → (4) आहारादीनां सेवने सततं प्रवृत्तिः
(3) जलवियोगः → (1) परिवारात् प्रतिमुखत्वम्
(4) जले निमग्नता → (2) सामाजिकव्यवहाराणां भाराधिक्यम्