chapter 1

ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)
2. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए

સાચો જવાબ: जगत के लोग झूठी बातों पर जल्दी विश्वास करते हैं।

સાચો જવાબ: हिन्दू और मुस्लिम ईश्वर के सच्चे मर्म (सच्चाई) को समझे बिना 'राम' और 'रहमान' के नाम पर आपस में लड़ते हैं।

સાચો જવાબ: मायावी और अज्ञानी गुरु से मंत्र प्राप्त करने वाले शिष्य स्वयं तो डूबते ही हैं, और अंतकाल में पछतावा करते हैं।

સાચો જવાબ: माला धारण करना, टोपी पहनना, छापा-तिलक लगाना तथा मूर्ति व वृक्षों की पूजा करना हिन्दू लोगों की पहचान (बाह्य आडंबर) है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए

સાચો જવાબ: जो लोग धर्म के नाम पर बाह्य आडंबरों (दिखावे, तीर्थ, व्रत, पूजा-पाठ) में लिप्त रहते हैं और आत्मज्ञान से विमुख हैं, वे लोग ईश्वर के सच्चे स्वरूप से दूर हैं।

સાચો જવાબ: पीर और औलिया केवल किताबें तथा कुराआन पढ़कर दूसरों को शिष्य बनाते हैं और मज़ार-कब्र की पूजा सिखाते हैं। वे बाहरी दिखावे में उलझे रहने के कारण खुदा के वास्तविक स्वरूप को नहीं जान पाए।

સાચો જવાબ: कबीर कहते हैं कि जो लोग आत्मज्ञान को छोड़कर पीपल के पेड़ और पत्थर की मूर्तियों की पूजा करते हैं तथा तीर्थ व व्रत में समय व्यर्थ गंवाते हैं, उनका ज्ञान बिल्कुल खोखला और व्यर्थ है।
4. पाँच से छह पंक्तियों में उत्तर लिखिए

સાચો જવાબ: कबीर के अनुसार, हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग अज्ञानता और बाह्य आडंबर में फँसे हुए हैं। हिन्दू 'राम' को अपना मानते हैं और मुस्लिम 'रहमान' को। दोनों ईश्वर के एक ही स्वरूप को न समझकर आपस में लड़ते-मरते हैं। हिंदुओं में दया और मुसलमानों में मेहर (कृपा) का भाव समाप्त हो गया है। दोनों ही सच्चे आत्मज्ञान को भूलकर दिखावे और पाखंड में लीन हैं, इसलिए कबीर दोनों को ही दीवाना (अज्ञानी) मानते हैं।

સાચો જવાબ: कबीर के अनुसार, हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के लोग दीवाने हैं। हिन्दू मूर्तिपूजा, पीपल-पूजन, छापा-तिलक और तीर्थ-व्रत के घमंड में सच्चे ज्ञान से दूर हैं। वहीं मुस्लिम पीर-औलिया बनकर किताबें व कुराआन पढ़ते हैं, लेकिन खुदा को नहीं पहचान पाते। दोनों के दिलों से दया और कृपा गायब हो चुकी है। अतः ईश्वर के एक रूप को न मानकर आपस में लड़ने वाले दोनों ही धर्मों के लोग अज्ञानी और दीवाने हैं।

સાચો જવાબ: कबीरदास जी ने धर्म में फैली कुरीतियों और बाह्य आडंबरों का तीव्र विरोध किया है। उन्होंने हिंदुओं के प्रात:काल स्नान, मूर्तिपूजा, पीपल-पूजन, छापा-तिलक और आसन लगाकर घमंड से बैठने का खंडन किया। वहीं मुसलमानों के टोपी-माला, किताबें पढ़कर मुरीद बनाना और कब्र-मज़ार दिखाने जैसे आडंबरों पर चोट की। कबीर का स्पष्ट मानना है कि ईश्वर की प्राप्ति बाह्य दिखावों से नहीं, बल्कि सच्चे आत्मज्ञान से होती है।

સાચો જવાબ:


  1. बौराना = दीवाना / पागल होना




  2. थोथा = खोखला / व्यर्थ




  3. अभिमान = अहंकार / घमंड




  4. अनुमान = अंदाज़ा / अंदेशा




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