chapter 12

ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl

1. सही विकल्प चुनकर खाली जगह भरिए :

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: दिलीप के अपनी एक सहेली के साथ सिनेमा देख आने के कारण हेमा दिन-भर रूठी रही और दूसरे ही दिन अपनी माँ के घर चली गई।

સાચો જવાબ: सड़क किनारे स्तब्ध खड़े बिजली के लैम्प निष्काम और निर्विकार भाव से सड़क पर प्रकाश डाल रहे थे।

સાચો જવાબ: दिलीप को समीप खड़ा देख लड़के ने कहा— "एक-एक पैसे में एक-एक ढेरी।"

સાચો જવાબ: लड़के की माँ एक बाबू के यहाँ चौका-बर्तन (घर की सफ़ाई और बर्तन माँजने) का काम करती थी।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: जिसे मनुष्य सबसे अधिक अपना समझकर उस पर पूरा भरोसा करता है, जब उसी अपने व्यक्ति से उसे अपमान और तिरस्कार प्राप्त होता है, तब मनुष्य का मन वितृष्णा से भर जाता है।

સાચો જવાબ: सड़कों पर जल रहे बिजली के लैम्पों के चारों ओर बिना किसी टकराव के गोल-गोल नृत्य करते लाखों पतंगे जगत के अद्भुत नमूने हैं, जो एक नक्षत्र की भांति अपने-अपने दायरे में निरंतर चक्कर काट रहे थे।

સાચો જવાબ: लड़के की माँ ढाई सौ रुपये महीना लेती थी। जब जगतू की माँ ने बाबू से कहा कि वह वही काम दो सौ रुपये में कर देगी, तो बाबू की घरवाली ने पैसे बचाने के लालच में उसे हटाकर जगतू की माँ को रख लिया।

સાચો જવાબ: जगतू की माँ का काम स्कूल की लड़कियों को उनके घरों से बुलाकर लाना था। जब स्कूल वालों ने लड़कियों को लाने-ले जाने के लिए अपनी बस/मोटर रख ली, तो उन्होंने जगतू की माँ को नौकरी से निकाल दिया।

સાચો જવાબ: पत्र की पहली ही पंक्ति में हेमा ने अपनी काल्पनिक पीड़ा का रोना रोते हुए लिखा था कि वह जीवन में दुःख देखने के लिए ही पैदा हुई है। निर्धन परिवार के वास्तविक और दारुण दुःख को देखकर लौटे दिलीप को हेमा का यह दिखावटी दुःख ढोंग लगा, इसलिए उसने चिढ़कर पत्र फाड़ दिया।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: दिलीप हेमा से अत्यंत स्नेह करता था, उसका सम्मान करता था और उसने हेमा को पूरी स्वतंत्रता दे रखी थी। इतना सब होने के बाद भी जब दिलीप अपनी एक सहेली के साथ केवल सिनेमा देखने चला गया, तो हेमा बात का बतंगड़ बनाकर दिन-भर रूठी रही और अगले ही दिन मायके चली गई। दिलीप के इतने आदर और प्रेम के बदले में जब हेमा ने उसे अपमान और तिरस्कार दिया, तो दिलीप का मन वितृष्णा और ग्लानि से भर गया। हेमा की इस बचकानी और स्वार्थी प्रतिक्रिया के कारण ही दिलीप के मन में क्षोभ का अंत न रहा।

સાચો જવાબ: रात के सन्नाटे में सड़क पर जल रहे बिजली के लैम्पों के चारों ओर लाखों पतंगे गोले बाँध-बाँधकर नृत्य कर रहे थे। वे पतंगे मनुष्य की अनुपस्थिति की परवाह किए बिना अपनी ही धुन में मग्न थे। प्रत्येक पतंगा आकाश में किसी नक्षत्र की तरह अपने तय मार्ग पर चक्कर काट रहा था। कोई छोटा दायरा बना रहा था तो कोई बड़ा, कोई दाएँ तो कोई बाएँ। इतनी बड़ी संख्या में होने के बावजूद वे अद्भुत अनुशासन में थे और कोई भी पतंगा किसी दूसरे से टकरा नहीं रहा था।

સાચો જવાબ: लड़के की कोठरी बेहद संकरी और तंग थी, जो शहरों में अक्सर ईंधन या कबाड़ रखने के लिए बनाई जाती है। उसकी ऊँचाई बमुश्किल एक सामान्य आदमी के कद के बराबर थी। कोठरी में मिट्टी के तेल की एक ढिबरी जल रही थी जो धुंधला लाल प्रकाश और धुआँ फैला रही थी। काली पड़ चुकी दीवार के सहारे श्राद्ध में दान दी जाने वाली एक छोटी-सी पुरानी चारपाई खड़ी थी, जिसके पायों से कुछ मैले कपड़े लटक रहे थे। कोठरी का माहौल भयानक दरिद्रता और कंगाली की कहानी बयाँ कर रहा था।

સાચો જવાબ: कंगाली और भुखमरी से जूझ रही माँ ने अपने छोटे बच्चे के सामने खुद भूखी रहकर भी यह झूठ बोला कि उसने सुबह देर से खाया था और उसे भूख नहीं है। उसने पकोड़े बेचकर कमाए गए पैसों से आने वाली सुबह बेटे को दाल-रोटी खिलाने का दिलासा दिया। एक माँ का अपने बच्चे के प्रति यह निश्छल त्याग, उसकी ममता और अत्यंत दारुण गरीबी की लाचारी को छिपकर देखना दिलीप की संवेदनशीलता के लिए सहन करना असंभव हो गया। दुःख की उस पराकाष्ठा को देखकर वह दाँतों से होंठ दबाकर चुपचाप पीछे हट गया।
5. आशय स्पष्ट कीजिए :

સાચો જવાબ: जब दिलीप घर के कलेश और मानसिक तनाव से परेशान होकर सुनसान रात में बाहर निकला, तो उसने देखा कि शांत सड़क पर बिजली के लैम्प जल रहे थे, वृक्षों के भीगे पत्ते चमक रहे थे और पतंगे लैम्प की रोशनी के चारों ओर एक निश्चित गति में नाच रहे थे। उन्हें इंसानों की मौजूदगी या अनुपस्थिति से कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था। इसे देखकर दिलीप को यह अहसास हुआ कि इंसान भले ही खुद को दुनिया का केंद्र समझे, लेकिन यह प्रकृति और संसार मनुष्य के बिना भी अपने नियम, व्यस्तता और सुंदरता के साथ निरंतर चलता रहता है।

સાચો જવાબ: इस कथन में यशपाल जी ने उच्च-मध्यम वर्ग के काल्पनिक/बनावटी दुःख और निम्न वर्ग की वास्तविक, हृदयविदारक कंगाली के अंतर को उजागर किया है। हेमा के पास धन, साधन और पति का संपूर्ण प्रेम है, फिर भी वह छोटी-सी बात पर रूठकर खुद को दुनिया की सबसे दुखी स्त्री मानती है। उसका यह 'दुःख' केवल उसका अहम और एक मानसिक विलास (रसीला दुःख) है। इसके विपरीत, गरीब परिवार के पास खाने को रोटी तक नहीं है और वे अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। दिलीप कहना चाहता है कि असली दुःख पेट की भूख और कंगाली होती है; हेमा का दुःख तो केवल एक स्वांग है, जिसके बिना उसका जीवन ही फीका पड़ जाए।
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