સાચો જવાબ:
इस कथन में यशपाल जी ने उच्च-मध्यम वर्ग के काल्पनिक/बनावटी दुःख और निम्न वर्ग की वास्तविक, हृदयविदारक कंगाली के अंतर को उजागर किया है। हेमा के पास धन, साधन और पति का संपूर्ण प्रेम है, फिर भी वह छोटी-सी बात पर रूठकर खुद को दुनिया की सबसे दुखी स्त्री मानती है। उसका यह 'दुःख' केवल उसका अहम और एक मानसिक विलास (रसीला दुःख) है। इसके विपरीत, गरीब परिवार के पास खाने को रोटी तक नहीं है और वे अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। दिलीप कहना चाहता है कि असली दुःख पेट की भूख और कंगाली होती है; हेमा का दुःख तो केवल एक स्वांग है, जिसके बिना उसका जीवन ही फीका पड़ जाए।