chapter 15

ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: कवयित्री साधारण, उपेक्षित, निष्कपट और कड़ी मेहनत करने वाले श्रमजीवी (मजदूर) लोगों को 'बाज़ लोग' कहती हैं।

સાચો જવાબ: बाज़ लोग आग को आशिष (आशीर्वाद) देते हैं कि वह जलती रहे और जहाँ भी जीवन है, वह बचा रहे।

સાચો જવાબ: सारी बाज़ियाँ हारकर भी बाज़ लोग अलमस्त और बेफ़िक्र होकर रहते हैं।

સાચો જવાબ: बाज़ लोग झुण्ड बनाकर बुझते हुए अलावों के चारों तरफ बैठते हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-दो वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: प्रस्तुत कविता में समाज के शोषित, उपेक्षित, गरीब और मेहनतकश (मजदूर) वर्ग का वर्णन किया गया है। वे जीवन-भर कठोर परिश्रम करके दूसरों के लिए दुनिया को सुंदर बनाते हैं, फिर भी स्वयं अभावों में जीवन बिताते हैं।

સાચો જવાબ: इस पंक्ति से तात्पर्य यह है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवन की जिजीविषा (जीने की इच्छा), मानवीय संवेदनाएँ और सकारात्मकता बची रहनी चाहिए। मजदूरी करने वाले बाज़ लोग दुनिया में जीवन और जीवनदायिनी ऊर्जा के बने रहने की कामना करते हैं।

સાચો જવાબ: पानी के सोते मेहनतकश लोगों के कठोर और खुरदरे हाथों द्वारा की गई कड़ी मेहनत से धरती के सीने से निकलते हैं। वे चट्टानों को तोड़कर और कुएँ-नहरें खोदकर पानी को जीवन योग्य बनाते हैं।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: 'बाज़ लोग कहाँ के नहीं होते' कहने से कवयित्री का आशय यह है कि समाज के शोषित व निर्धन मजदूर वर्ग का कोई निश्चित स्थायी ठिकाना, पहचान या सामाजिक अधिकार नहीं होता। वे जीवन भर हाड़-तोड़ मेहनत करके भव्य इमारतें, सड़कें और शहर बनाते हैं, लेकिन उन्हें कहीं भी स्थायित्व या सम्मान नहीं मिलता। समाज उन्हें उपेक्षित छोड़ देता है और वे हमेशा बेघर तथा बेनाम ही रह जाते हैं। उनका नाम और अस्तित्व कहीं दर्ज नहीं होता, इसलिए कवयित्री कहती हैं कि उनका अपना कोई स्थान नहीं होता।

સાચો જવાબ: बाज़ लोग अपनी दिन-रात की कड़ी मेहनत के बावजूद जीवन में आर्थिक तंगी, गरीबी और अभावों का ही सामना करते हैं। संसार की सफलता और सुख-सुविधाओं की दृष्टि से वे सब कुछ हार चुके होते हैं। फिर भी, वे परिस्थितियों से निराश होकर जीवन जीने का उत्साह नहीं खोते। उनके पास छल-कपट या शिकायत नहीं होती; वे बेफ़िक्र, संतोषी और सकारात्मक भाव से जीवन व्यतीत करते हैं। इसी अदम्य जिजीविषा और बेपरवाह स्वभाव के कारण वे 'अलमस्त' कहलाते हैं।

સાચો જવાબ:

(2) 'बाज़ लोग सारी बाज़ियाँ हारकर भी होते हैं अलमस्त बाज़ीगर' !!




आशय: बाज़ीगर वह होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपना हौसला और खेल का मज़ा नहीं खोता। यहाँ कवयित्री कहना चाहती हैं कि श्रमजीवी लोग दुनिया के हर सुख और साधन से वंचित रह जाते हैं और जीवन की हर भौतिक बाज़ी हार जाते हैं। इसके बावजूद वे अंदर से टूटते नहीं हैं, बल्कि जीवन की बुनियादी सच्चाई, आनंद और गर्मजोशी को संजोकर रखते हैं। दुखों के बीच भी खुश रहने और दूसरों के कल्याण की कामना करने का यह जज़्बा उन्हें सच्चा 'अलमस्त बाज़ीगर' बनाता है।



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