ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl
आशय: यदि कल्पना का उपयोग केवल हवाई किले बनाने और व्यर्थ के सोच-विचार में किया जाए, तो वह मनुष्य को कर्तव्यविमुख बना देती है। केवल विचार करते रहने और कार्य न करने से समय नष्ट होता है और अंत में पछतावा ही हाथ लगता है, इसलिए केवल शुष्क कल्पना में पड़े रहना एक बुरी बला के समान है।
आशय: मनुष्य को ईश्वर से कई मानसिक शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिनमें कल्पनाशक्ति सबसे अनोखी है। यही वह शक्ति है जिसके बल पर कवि अमर साहित्य रचते हैं, वैज्ञानिक नए आविष्कार करते हैं और मनुष्य नित्य नई मानसिक सृजनात्मकता का परिचय देता है।
तर्क-वितर्क: तर्क और वितर्क — द्वंद्व समास
सृष्टि-निर्माण-कौशल: सृष्टि के निर्माण का कौशल — तत्पुरुष समास
महादार्शनिक: महान है जो दार्शनिक — कर्मधारय समास
गौतम: अनुमान करते-करते हैरान होकर स्वयं "गौतम" (अंधेरे/गहन चिंतन में गुम) हो गए।
कपिल: पच्चीस तत्त्वों की कल्पना करते-करते "कपिल" अर्थात पीले (कमज़ोर/निस्तेज) पड़ गए।
कल्पना: केवल विचार या 'थ्योरी' में उलझकर रह जाना, जिससे काम न बने और अंत में हाथ मल-मलकर 'कलपना' (दुखी होना) पड़े।
सही उत्तर: (क) ईश्वरप्रदत्त
सही उत्तर: (ख) प्रतिभा
सही उत्तर: (ख) ब्रह्मा