chapter 2

ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (D)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)
2. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: लेखक ने महात्मा गांधी (बापू) को विश्ववंद्य व्यक्ति कहा है।

સાચો જવાબ: बापू का बिस्तरा खजूर की चटाई पर एक गद्दा डालकर और उसे खादी की चादर से ढककर बनाया गया था।

સાચો જવાબ: हिन्दुत्त्व के नाम पर अज्ञानी हत्यारे (नाथूराम गोडसे) ने महात्मा गांधी की हत्या करके अनर्थ किया।

સાચો જવાબ: तिम दिनों में बापू की सेवा राजकुमारी अमृत कौर करती थीं।

સાચો જવાબ: थक जाने पर बापू दीवार से सटी काठ की तख्ती के सहारे रखे बड़े तकिये के सहारे बैठते थे।
3. दो-तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: लेखक स्वयं को दुर्भागी इसलिए समझते हैं क्योंकि जब बापू जीवित थे, तब वे उनके आश्रम पहुँचकर उनके दर्शन नहीं कर सके और न ही उनके चरण-स्पर्श कर अपने जीवन को कृतकृत्य कर सके।

સાચો જવાબ: लेखक ने गांधीजी के बिस्तरे को गौरवशाली इसलिए कहा है क्योंकि उस सादे बिस्तरे पर कई दिनों, महीनों और वर्षों तक महात्मा गांधी जैसे महान राष्ट्रपिता आसीन रहे हैं। ऐसा गौरव किसी रत्नजड़ित स्वर्ण-सिंहासन को भी प्राप्त नहीं हुआ।

સાચો જવાબ: गांधीजी के शैल्फ के पहले खाने में— सार्थ गुजराती जोडणी कोश, रिथिंकिंग क्रिश्चियैनिटी, हज़रत ईसा और ईसाई धर्म, तथा श्रीमद्भगवद्गीता थीं। दूसरे खाने में— रामचरितमानस, श्रीस्वास्थ्य-वृत्ति, आश्रमभजनावली और गीता आणि गीताई थीं।

સાચો જવાબ: 'हे राम!' शब्दों की स्मृति ने लेखक को बापू की उपस्थिति की सुंदर कल्पना से निकालकर इस निष्ठुर वास्तविकता की कठोर चट्टान पर पटक दिया कि बापू अब हमारे बीच नहीं रहे और गोलियों के तीन भयानक धड़ाकों के साथ वे हमसे छीन लिए गए हैं।

સાચો જવાબ: बापू के तीनों बंदर इशारे से कह रहे हैं कि अपनी आँखें बंद करो, ज़बान बंद करो, और कान बंद करो। अपने आप को आत्मस्थ करो, तब तुम्हें अहसास होगा कि बापू यहीं हमारे बीच विद्यमान हैं।
4. पाँच से छः पंक्तियों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: लेखक बापू के जीवनकाल में उनसे न मिल पाने को अपना दुर्भाग्य मानते थे, परंतु उनकी अनुपस्थिति में कुटिया में आकर उन्हें लगा कि उनका दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल गया। यदि वे बापू के रहते आते, तो उन्हें बापू के बिस्तरे के इतने निकट, इतने शांत एकांत वातावरण में बैठने और कुटिया की हर वस्तु से गहरा तादात्म्य स्थापित करने का अवसर नहीं मिलता। यहाँ अकेले बैठकर बापू के पायताने अपनी लेखनी को सार्थक करने का जो अवसर उन्हें मिला, इसीलिए वे स्वयं को अत्यधिक सौभाग्यशाली मानते हैं।

સાચો જવાબ:

बापू के कमरे में खजूर की चटाई और खादी से ढका बिस्तरा, तकिया, तुलसी की माला, यरवदा-चक्र (चरखा), और रद्दी कागजों का पत्तों का टोकरा दिखाई देता है। इसके अलावा पीतल का थूकदान, कलमदान, पेंसिल, कताई की पूनी-ताँत, तीन खानों का शैल्फ, उसमें रखी पुस्तकें, तीन बंदर, चिकना पत्थर, तीन लिखने के छोटे डेस्क, अतिथियों के बैठने के लिए कालीन तथा दीवारों पर टँगी प्रेरणादायक सूक्तियाँ और 'ओम्' का चित्र दिखाई देता है।



સાચો જવાબ: लेखक बापू के बिस्तरे को इसलिए महान मानता है क्योंकि खजूर की चटाई और खादी से ढका वह अत्यंत सादा बिस्तरा था, फिर भी उसकी सादगी के सामने बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं के रत्नजड़ित स्वर्ण-सिंहासन भी ईर्ष्या करते होंगे। उस बिस्तरे को विश्व के सबसे महान युगपुरुष महात्मा गांधी को वर्षों तक अपने ऊपर धारण करने का दुर्लभ गौरव प्राप्त हुआ था।

સાચો જવાબ: जिस कुटिया में बिछी चटाइयों पर कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे देश के शीर्ष नेता और दुनिया के बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ, पत्रकार तथा साहित्यकार बैठा करते थे; आज उसी शांत दुपहरिया में अकेला लेखक उन्हीं चटाइयों पर बैठा है। इस ऐतिहासिक और पवित्र स्थान पर स्वयं के उपस्थित होने की यह विचारपूर्ण कल्पना ही लेखक को भावमुग्ध कर देती है।
5. आशय स्पष्ट कीजिए :

સાચો જવાબ: लेखक बापू के जीवनकाल में उनकी कुटिया में न आ पाने को अपना बड़ा दुर्भाग्य मानते थे। लेकिन बापू के जाने के बाद जब वे वहाँ पहुँचे, तो उन्हें एकांत में बापू के बिस्तरे के पास बैठने, उनकी हर वस्तु को आत्मसात करने और उनसे तादात्म्य स्थापित करने का अनूठा अवसर मिला। इसी संदर्भ में लेखक ने कहा है कि कभी-कभी जीवन की अप्रिय स्थितियाँ या दुर्भाग्य भी इंसान के लिए बड़े सौभाग्य में बदल जाता है।

સાચો જવાબ: इस सूक्ति का आशय यह है कि जो व्यक्ति सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलता है, उसे अपने विचार या पक्ष को साबित करने के लिए क्रोध करने अथवा उत्तेजित होने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि सत्य स्वयं में शक्तिशाली होता है। वहीं, जो व्यक्ति स्वयं गलत राह पर है, उसे क्रोध करने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं रहता।

સાચો જવાબ: बापू के अनुसार झूठ केवल गलत शब्द बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि झूठ का वास्तविक आधार किसी को धोखा देना या छल करना है। यदि कोई व्यक्ति सत्य जानते हुए भी मौन रहता है, आँख के इशारे करता है, या दोहरे अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग करके किसी को गुमराह करता है, तो वह चुप्पी भी स्पष्ट रूप से बोले गए झूठ से कहीं अधिक खतरनाक और निष्प्राण होती है।
6. दिए गए विधानों की पूर्ति करके उचित विकल्प चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए:
6. दिए गए विधानों की पूर्ति करके उचित विकल्प चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए:

સાચો જવાબ: (ख) यरवदा - चक्र



पूरा वाक्य: अपने बिस्तरे पर बैठे बापू अपने यरवदा - चक्र को घुमा रहे हैं।

સાચો જવાબ: (क) भलि-भाँति देखना



पूरा वाक्य: बापू को समझने के लिए इस छोटे-से शैल्फ को भलि-भाँति देखना ही होगा ।

સાચો જવાબ: (घ) वचनामृत



पूरा वाक्य: इन्हीं चटाइयों पर देश-विदेश के बड़े-बड़े व्यक्ति बैठते और बापू के मुख से निकले वचनामृत का पान करते ।

સાચો જવાબ:


  1. चरणस्पर्श = चरणों का स्पर्श ➔ तत्पुरुष समास (संबंध तत्पुरुष)




  2. कलमदान = कलम रखने के लिए दान/पात्र ➔ तत्पुरुष समास (संप्रदान तत्पुरुष)




  3. रत्नजड़ित = रत्नों से जड़ित ➔ तत्पुरुष समास (करण तत्पुरुष)




  4. स्वर्ण सिंहासन = स्वर्ण का सिंहासन ➔ तत्पुरुष समास (संबंध तत्पुरुष)




  5. भावमुग्ध = भाव से मुग्ध ➔ तत्पुरुष समास (करण तत्पुरुष)




  6. वचनामृत = वचन रूपी अमृत ➔ कर्मधारय समास




સાચો જવાબ:


  1. हिन्दुत्व = हिन्दू + त्व




  2. अर्थवाला = अर्थ + वाला




  3. साहित्यिक = साहित्य + इक




  4. स्वच्छता = स्वच्छ + ता




  5. चटाइयाँ = चटाई + याँ




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