સાચો જવાબ:
जब पाकिस्तानी पठान सैनिक ने आत्मीयता से कथा-नायक को चाय पीने के लिए अपनी सीमा के अंदर आमंत्रित किया, तो कथा-नायक ने अत्यंत विनम्रतापूर्वक हाथ जोड़कर कहा, "बहुत-बहुत शुक्रिया! बड़ी खुशी होती आपके साथ बैठकर, लेकिन मुझे आप ही वापस लौटना है और वक्त बहुत कम है। आप तो माफी चाहते हैं।" कथा-नायक के मन में यह संकोच और भय था कि यदि वे सीमा पार गए, तो भारतीय सैनिक या उनके अपने देश के लोग उन्हें संशय की दृष्टि से देख सकते हैं।