chapter 5

ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से उचित विकल्प चुनकर लिखिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (D)
2. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: पसीना बहाकर (मेहनत से) कमाया हुआ एक पैसा भी मुफ़्त (फ़ोकट) में मिले धन के हंडे से ज़्यादा मूल्यवान है।

સાચો જવાબ: बालक को पाठशाला से यह सबक लेना चाहिए कि बेईमानी से पाई सफलता से सीधे-सीधे टकराई असफलता अधिक श्रेयस्कर (मंगलकारी) होती है।

સાચો જવાબ: बालक को अपने विचारों और अपनी सूझ-बूझ पर पूर्ण विश्वास बनाये रखना चाहिए, भले ही पूरी दुनिया उसे गलत ठहराए।

સાચો જવાબ: बालक को भलों के साथ भलाई का व्यवहार करना चाहिए और टेढ़ों (बुरे लोगों) को सही सबक सिखाना चाहिए।

સાચો જવાબ: बालक को चाटुकारी (चापलूसी) से सावधान रहना चाहिए और ओछेपन को मानने से बचना चाहिए।
3. दो-तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: लिंकन का पुत्र कभी न कभी यह ज़रूर देखेगा कि दुनिया में सभी व्यक्ति न्यायप्रिय और सत्यनिष्ठ नहीं होते। लेकिन साथ ही वह यह भी जानेगा कि अगर दुनिया में बदमाश हैं तो सज्जन पुरुष भी हैं, और अगर दुश्मन हैं तो सहायक मित्र भी हैं।

સાચો જવાબ: दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं— एक तरफ स्वार्थी, दुष्ट और धोखेबाज़ लोग होते हैं, तो दूसरी तरफ अपने सिद्धांतों और देश के लिए पूरी ज़िंदगी न्योछावर करने वाले सच्चे नेता, साधुचरित सज्जन और सच्चे मित्र भी होते हैं।

સાચો જવાબ: काव्य में आकाश में चिड़ियों की गगन उड़ान, सुनहरी धूप में मँडराते हुए भौंरे और हरी-भरी पहाड़ी की ढलान पर हवा में झूमते हुए नन्हें-नन्हें फूलों का सुंदर प्राकृतिक वर्णन किया गया है।
4. पाँच से छः पंक्तियों में उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: लिंकन अपने पुत्र के अंदर ईमानदारी, परिश्रम, स्वावलंबन, धैर्य और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करना चाहते थे। वे चाहते थे कि उनका पुत्र हार और जीत दोनों को सहजता से स्वीकारे, ईर्ष्या-द्वेष से दूर रहे, भीड़ के पीछे अंधभक्त बनकर न भागे, सबकी सुने लेकिन सत्य की कसौटी पर परखकर ही सही बात को ग्रहण करे। इसके अलावा वह अपनी मेहनत पर भरोसा रखे और सत्य व न्याय की ख़ातिर अडिग होकर संघर्ष करे।

સાચો જવાબ: लिंकन अपने पुत्र को एक सच्चा, साहसी, स्वाभिमानी और विवेकशील मनुष्य बनाना चाहते थे। वे उसे ऐसा बनाना चाहते थे जो अपनी बुद्धि और ताकत का पूरा इस्तेमाल करे, लेकिन अपनी आत्मा और ईमान को कभी न बेचे। वह कठिनाइयों में भी हँसना जाने, अपनी गलती स्वीकारने और रोने में न शरमाए। वह लाड़-प्यार से बिगड़े बिना, आग में तपकर निकले फौलाद की तरह मजबूत इंसान बने जो खुद पर भरोसा रखे और संपूर्ण मानव जाति के प्रति उदात्त श्रद्धा रखे।

સાચો જવાબ: अब्राहम लिंकन ने यह पत्र मुख्य रूप से अपने पुत्र के चरित्र-निर्माण को ध्यान में रखकर लिखा है, परंतु इसका माध्यम शिक्षक को बनाया है। एक पिता अपने बच्चे की केवल अच्छी आदतों की इच्छा कर सकता है, लेकिन बालक को तराशने और उसके भीतर नैतिक मूल्यों को स्थापित करने की मुख्य ज़िम्मेदारी शिक्षक की ही होती है। इसलिए लिंकन ने शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता मानते हुए यह पत्र लिखा ताकि शिक्षक उनके पुत्र को एक आदर्श और चरित्रवान नागरिक बना सके।

સાચો જવાબ: मुझे पत्र का यह अंश सबसे अच्छा लगा— "सुने सबकी, हर एक की... पर छान ले उसे सत्य की छलनी में और छिलका फेंककर ग्रहण करे विशुद्ध सार।" यह अंश इसलिए सबसे बेहतरीन है क्योंकि आज के समय में बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों पर विश्वास कर लेना कई समस्याओं की जड़ है। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि व्यक्ति को स्वतंत्र सोच रखनी चाहिए, सभी के विचारों को सुनकर अपनी बुद्धि व सत्य की कसौटी पर परखना चाहिए और केवल सही तथा उपयोगी बातों को ही जीवन में अपनाना चाहिए।

સાચો જવાબ: अब्राहम लिंकन चाहते हैं कि उनका पुत्र पुस्तकों के अद्भुत वैभव और ज्ञान का महत्व समझे क्योंकि पुस्तकें मनुष्य के विचार, ज्ञान और समझ को समृद्ध बनाती हैं। वे जीवन जीने की सही दिशा दिखाती हैं। लेकिन साथ ही वे यह भी चाहते हैं कि वह केवल किताबी कीड़ा न बने; बल्कि प्रकृति की सनातन सुंदरता, प्राकृतिक सौंदर्य और जीवन के व्यावहारिक अनुभवों का आनंद लेने के लिए भी अपने मन को फुरसत दे, ताकि उसका सर्वांगीण विकास हो सके।

સાચો જવાબ:


  1. असफलता ➔ सफलता




  2. हर्ष ➔ शोक / विषाद




  3. संयम ➔ असंयम




  4. झुकाना ➔ उठाना




  5. विशुद्ध ➔ अशुद्ध / मिलावटी




સાચો જવાબ:


  1. पुरुषोत्तम = पुरुषों में जो उत्तम है ➔ कर्मधारय समास (या अधिकरण तत्पुरुष)




  2. पाठशाला = पाठ के लिए शाला (गृह) ➔ तत्पुरुष समास (संप्रदान तत्पुरुष)




  3. न्यायोचित = न्याय के अनुसार उचित ➔ तत्पुरुष समास (या कर्मधारय)




  4. ईर्ष्या-द्वेष = ईर्ष्या और द्वेष ➔ द्वंद्व समास














 
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