ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl
संभु ➔ शंभु / शिव
छति ➔ क्षति / हानि
कोही ➔ क्रोधी
पहारू ➔ पहाड़ / पर्वत
गाई ➔ गाय
गारी ➔ गाली
सोभा ➔ शोभा
"भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी । जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी ॥
सुर महिसुर हरिजन अरु गाई । हमरें कुल इन्ह पर न सुराई ॥"
भावार्थ: लक्ष्मणजी परशुरामजी से कहते हैं कि हे मुनि! आपको भृगुवंशी समझकर और आपके गले में यज्ञोपवीत (जनेऊ) देखकर आप जो कुछ भी कठोर वचन कह रहे हैं, उसे मैं अपने क्रोध को रोककर चुपचाप सह रहा हूँ। इसका कारण यह है कि हमारे रघुकुल की यह परंपरा है कि हम देवता (सुर), ब्राह्मण (महिसुर), भगवान के भक्त (हरिजन) और गाय—इन चारों पर अपनी वीरता (शूरवीरता) नहीं दिखाते। यदि इनसे हमारा वध हो जाए तो पाप लगता है और इनसे हारने पर अपकीर्ति (अपयश) होती है।