chapter 7

ધોરણ 11 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से चुनकर लिखिए :

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)
2. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: शिवजी का धनुष तोड़नेवाले को परशुराम सहस्रबाहु (सहसबाहु) के समान अपना शत्रु कहते हैं।

સાચો જવાબ: परशुराम बाल ब्रह्मचारी, अत्यंत क्रोधी और समस्त संसार में क्षत्रिय कुल के द्रोही (विनाशक) के रूप में जाने जाते हैं।

સાચો જવાબ: सहस्रबाहु की भुजाओं को काटनेवाले अस्त्र का नाम परशु (फरसा/कुठार) था।

સાચો જવાબ: परशुराम के क्रोधरूपी अग्नि को बढ़ते देखकर श्रीराम जल के समान शांत और शीतल वचन बोलते हैं।
3. दो-दो वाक्यों में उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: परशुराम का फरसा अत्यंत घोर और भयानक है। उनका फरसा गर्भ में पल रहे बच्चों (अर्भक) का भी नाश कर देने वाला है।

સાચો જવાબ: श्रीरामजी परशुराम को एक महान ऋषि, ज्ञानी और पूजनीय मुनि बताते हैं तथा स्वयं को उनका एक विनम्र दास (सेवक) कहते हैं।

સાચો જવાબ: लक्ष्मणजी के व्यंग्यपूर्ण और कठोर वचन सुनकर परशुरामजी अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं और उन पर प्रहार करने के लिए अपना भयंकर फरसा (कुठार) हाथ में उठा लेते हैं।
4. पाँच-छः पंक्तियों में उत्तर लिखिए:

સાચો જવાબ: परशुरामजी को अत्यंत क्रोधित देखकर श्रीराम ने विनम्रतापूर्वक कहा कि शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा। आप मुझे आज्ञा दीजिए कि मेरे लिए क्या आदेश है। जब परशुराम का क्रोध और बढ़ा, तो राम ने शांतिपूर्वक कहा कि हमने तो इसे पुराना और साधारण धनुष समझकर छुआ था, यह तो छूते ही टूट गया। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। श्रीराम के ऐसे अत्यंत विनम्र और जल के समान शीतल वचनों ने परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास किया।

સાચો જવાબ: परशुरामजी का अत्यधिक क्रोध देखकर लक्ष्मणजी हंसकर और व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि बचपन में हमने ऐसी कई धनुहियाँ तोड़ी थीं, तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। इस धनुष पर आपकी इतनी ममता क्यों है? लक्ष्मणजी आगे कहते हैं कि हम रघुकुल के लोग देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय पर अपनी वीरता नहीं दिखाते। आप तो व्यर्थ ही धनुष-बाण और फरसा धारण किए हैं, आपके तो वचन ही करोड़ों वज्रों के समान कठोर हैं।

સાચો જવાબ:


  1. संभु ➔ शंभु / शिव




  2. छति ➔ क्षति / हानि




  3. कोही ➔ क्रोधी




  4. पहारू ➔ पहाड़ / पर्वत




  5. गाई ➔ गाय




  6. गारी ➔ गाली




  7. सोभा ➔ शोभा




સાચો જવાબ:

"भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी । जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी ॥



सुर महिसुर हरिजन अरु गाई । हमरें कुल इन्ह पर न सुराई ॥"





भावार्थ: लक्ष्मणजी परशुरामजी से कहते हैं कि हे मुनि! आपको भृगुवंशी समझकर और आपके गले में यज्ञोपवीत (जनेऊ) देखकर आप जो कुछ भी कठोर वचन कह रहे हैं, उसे मैं अपने क्रोध को रोककर चुपचाप सह रहा हूँ। इसका कारण यह है कि हमारे रघुकुल की यह परंपरा है कि हम देवता (सुर), ब्राह्मण (महिसुर), भगवान के भक्त (हरिजन) और गाय—इन चारों पर अपनी वीरता (शूरवीरता) नहीं दिखाते। यदि इनसे हमारा वध हो जाए तो पाप लगता है और इनसे हारने पर अपकीर्ति (अपयश) होती है।













 
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