સાચો જવાબ:
प्रथम पद में कृष्ण के विरह में तड़पती मीरा के मनोभावों का मार्मिक वर्णन है। मीरा कहती हैं कि हरि के बिना उन्हें संसार की कोई भी वस्तु अच्छी नहीं लगती। उनके प्रियतम उनसे आने का वादा करके गए थे, परंतु अभी तक नहीं आए, जिससे उनका मन बहुत व्याकुल है। मीरा को प्रभु के चरण-कमल से सच्चा प्रेम है और वे लगातार उनके दर्शन की आस लगाए बैठी हैं। वे प्रार्थना करती हैं कि प्रभु उन्हें दर्शन देकर कृतार्थ करें।