ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl
मधुघट (मदिरा का घड़ा) और मनुष्य जीवन दोनों ही कोमल मिट्टी से निर्मित तथा क्षणभंगुर हैं। जिस प्रकार मिट्टी के घट और प्याले लघु जीवन लेकर आते हैं और उनका टूटना-फूटना तय होता है, उसी प्रकार मनुष्य का शरीर भी नाशवान है और मृत्यु निश्चित है। प्याले टूटकर मिट्टी में मिल जाते हैं तो कभी वापस नहीं उठते, ठीक उसी प्रकार बीता हुआ समय और मृत व्यक्ति लौटकर नहीं आता। इसलिए जिस प्रकार मदिरालय प्यालों के टूटने पर पछतावा नहीं करता, उसी प्रकार ज्ञानी मनुष्य भी जीवन की नश्वरता को स्वीकार कर दुख प्रकट नहीं करता।