chapter 11

ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर पंक्ति पूर्ण कीजिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: तारों के टूटने और बिछड़ने पर अम्बर (आकाश) कभी शोक नहीं मनाता है।

સાચો જવાબ: कलियाँ और वल्लरियाँ (लताएँ) मधुवन (उपवन/बगीचे) का हिस्सा हैं।

સાચો જવાબ: मधुघट नश्वर मानव जीवन और उसकी क्षणभंगुर भौतिक उपलब्धियों का प्रतीक है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए:

સાચો જવાબ: सितारे के रूपक से कवि यह समझाना चाहता है कि जीवन में हमारे प्रिय व्यक्ति या वस्तु के चले जाने (नष्ट होने) पर दुखी होना व्यर्थ है। जिस प्रकार अनगिनत तारों के टूटने पर भी आकाश कभी शोक नहीं मनाता, उसी प्रकार मनुष्य को भी अतीत के दुखों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।

સાચો જવાબ: मुरझाई कलियों और सूखी लताओं पर मधुवन (बगीचा) कभी दुख प्रकट नहीं करता और न ही शोर मचाता है। वह प्रकृति के शाश्वत नियम को सहजता से स्वीकार कर आगे बढ़ता है।

સાચો જવાબ: कवि 'सच्चे मधु से जला हुआ' का प्रयोग उस अनुभवी और दृढ़ निश्चयी मनुष्य के लिए करता है जो जीवन के वास्तविक मर्म और उसकी नश्वरता को समझता है तथा किसी वस्तु के खो जाने पर रोता-चिल्लाता नहीं है।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छः पंक्तियों में लिखिए:

સાચો જવાબ: कवि कुसुम (फूल) के प्रतीक द्वारा संदेश देता है कि सौंदर्य, यौवन और प्रिय वस्तुएँ सदा एक जैसी नहीं रहतीं; समय के साथ उनका नष्ट होना निश्चित है। जिस फूल पर हम अपना सब कुछ न्योछावर करते हैं, यदि वह सूख जाए तो उस पर दुखी होना व्यर्थ है। कवि मधुवन (बगीचे) का उदाहरण देते हैं कि उसकी अनगिनत कलियाँ और लताएँ मुरझाती और सूखती रहती हैं, पर उपवन कभी उनके लिए शोर नहीं मचाता। अतः मनुष्य को भी अपने अतीत के अभावों और दुखों पर आंसू बहाने के बजाय वर्तमान में जीने की कला सीखनी चाहिए।

સાચો જવાબ:

मधुघट (मदिरा का घड़ा) और मनुष्य जीवन दोनों ही कोमल मिट्टी से निर्मित तथा क्षणभंगुर हैं। जिस प्रकार मिट्टी के घट और प्याले लघु जीवन लेकर आते हैं और उनका टूटना-फूटना तय होता है, उसी प्रकार मनुष्य का शरीर भी नाशवान है और मृत्यु निश्चित है। प्याले टूटकर मिट्टी में मिल जाते हैं तो कभी वापस नहीं उठते, ठीक उसी प्रकार बीता हुआ समय और मृत व्यक्ति लौटकर नहीं आता। इसलिए जिस प्रकार मदिरालय प्यालों के टूटने पर पछतावा नहीं करता, उसी प्रकार ज्ञानी मनुष्य भी जीवन की नश्वरता को स्वीकार कर दुख प्रकट नहीं करता।












 
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