chapter 13

ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उनके नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (D)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: आर्य शास्त्रव्यवस्था में मनुष्य जीवन के चार आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) बताये गए हैं।

સાચો જવાબ: शिलालेख (पत्थरों) पर शासकों की विजय, सफलताओं और झूठे इतिहास से जुड़ी प्रशंसाएँ/प्रशस्तियाँ लिखी जाती हैं।

સાચો જવાબ: : जड़ पदार्थ कभी भी 'चेतन' (जीवंत आत्मा/मानवता) का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।

સાચો જવાબ: श्रेष्ठ योद्धा के रूप में 'अर्जुन' (सव्यसाची) जाने जाते हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए:

સાચો જવાબ: युधिष्ठिर के अनुसार सत्य की प्राप्ति किसी दूसरे से प्रश्न करके या तर्क-वितर्क से नहीं होती, बल्कि इसके लिए स्वयं के भीतर अंतरात्मा से सच्ची जिज्ञासा करनी होती है।

સાચો જવાબ: युधिष्ठिर के अनुसार भौतिक वस्तुओं, संपत्ति और मोह-माया से हीन (मुक्त) होने का वास्तविक अर्थ अपने भीतर के व्यक्तित्व और आत्मिक चेतना से संपन्न होना है।

સાચો જવાબ: युधिष्ठिर के अनुसार उनके अमानवीय कृत्यों और युद्धों का यही संकुचित निष्कर्ष निकलेगा कि अर्जुन से श्रेष्ठ कोई योद्धा नहीं है और युधिष्ठिर ही एकमात्र चक्रवर्ती सम्राट हैं।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छः पंक्तियों में लिखिए:

સાચો જવાબ: युधिष्ठिर अर्जुन को समझाते हैं कि राज्य, साम्राज्य, धन-संपत्ति और सफलताएँ एक ऐसा षड्यंत्र (कुचक्र) हैं जिन्हें मनुष्य अपने चारों ओर बुन लेता है और उसी में उलझकर रह जाता है। लोग सोचते हैं कि विशाल दुर्ग, बड़े-बड़े महल (प्रासाद), स्मृति-भवन और चारणों द्वारा गाई गई प्रशस्तियाँ उन्हें अमरता प्रदान करेंगी, किंतु यह उनका भ्रम है। जड़ वस्तुएँ कभी चेतन मनुष्य को अमर नहीं बना सकतीं। भौतिक सफलताओं और इतिहास के शिलालेखों के माध्यम से अमरता पाने का प्रयास निरर्थक है; वास्तविक अमरता आत्म-साक्षात्कार और मानवीय मूल्यों की रक्षा से ही मिलती है।

સાચો જવાબ: प्रत्येक युद्ध विनाश और अमानवीयता को जन्म देता है। युद्ध केवल साम्राज्य या राज्य स्थापित करने के लिए लड़े जाते हैं, परंतु इसका खामियाजा आम निर्दोष जनता को भुगतना पड़ता है। युद्ध अनगिनत स्त्रियों को विधवा और बच्चों को अनाथ कर देता है, जो जीवन के कठोर संघर्ष में दिशाहीन होकर भटकने पर मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा, युद्ध के कारण समाज में कुलगोत्रहीनता और वर्णसंकरता बढ़ती है, जिससे नैतिक मूल्यों का पतन होता है। अंततः युद्ध और आतंक ही सामाजिकता के पर्याय बनकर पूरी मानवता को अंधकारमय मार्ग की ओर धकेल देते हैं।

સાચો જવાબ: इस पंक्ति के माध्यम से युधिष्ठिर भौतिकवादी और सत्तावादी सोच पर गहरा प्रहार करते हैं। वे कहते हैं कि ईंट-पत्थरों से बने किले, राजप्रासाद, स्मारक और निर्जीव पत्थरों पर उकेरे गए शिलालेख 'जड़' वस्तुएँ हैं। ये केवल मिट्टी और पत्थर जैसी निर्जीव चीज़ों की भव्यता को ही दर्शा सकते हैं; वे मनुष्य की संवेदना, भावना, दया, न्याय और आत्मिक चेतना ('चेतन') का प्रतिनिधित्व कभी नहीं कर सकते। यदि मनुष्य इन जड़ वस्तुओं के संग्रह और सफलताओं को ही अपने जीवन का लक्ष्य मान लेता है, तो वह अपने चेतन व्यक्तित्व को खो बैठता है।
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