સાચો જવાબ:
सुभाष बाबू की विमान दुर्घटना में मृत्यु की खबर सुनकर देशवासियों के मन पर गहरा आघात लगा, किंतु किसी ने भी उनकी मौत पर सचमुच विश्वास नहीं किया। भारतवासियों को लगता रहा कि वे 'रहस्य' हैं और किसी दिन, किसी वेश या देश में वापस लौट आएँगे। उनकी मृत्यु पर कुछ विरोधियों के मन से भले काँटा निकल गया हो, पर देशप्रेमी भारतीयों के हृदय में एक स्थायी पीड़ा (काँटा) चुभ गई। भारतीय मन उनका श्राद्ध करने को भी तैयार नहीं हुआ, क्योंकि उनका मानना था कि सुभाष बाबू जहाँ कहीं भी हैं, जीवित और अमर हैं।