chapter 14

ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उनके नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर दीजिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: सुभाष बाबू अज्ञात लोक के यात्री से अनंत लोक (अमर लोक) के यात्रा-पथी हो गए।

સાચો જવાબ: सुभाष बाबू भारतवासियों (समस्त देशवासियों) की कल्पनाओं पर छाये हुए थे।

સાચો જવાબ: सुभाष बाबू देशबंधु चित्तरंजन दास (सी. आर. दास) के क्रान्तिवादियों के दल में पहुँच गए थे।

સાચો જવાબ: बंगाल का नेतृत्व प्राप्त करने के लिए सुभाष बाबू का देश-प्रिय सेनगुप्ता से संघर्ष हुआ तथा बाद में कांग्रेस में गांधीजी एवं अन्य शीर्ष नेताओं से संघर्ष हुआ।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए:

સાચો જવાબ: सुभाष बाबू द्वितीय विश्वयुद्ध को ईश्वर (प्रभु) द्वारा प्रदान की गई एक 'स्वर्ण-संधि' समझते थे, जिसका उपयोग वे भारतीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए निश्चिंत होकर करना चाहते थे।

સાચો જવાબ:

सुभाष बाबू ने अपने सिद्धांतों और अपनी दृढ़ता को कभी भी 'अवसरवादिता की गंदी चादर' से नहीं ढँका; वे जो सोचते थे, उस पर पूरी निष्ठा से अडिग रहते थे।


સાચો જવાબ: स देश के सामंत, वीर, योद्धा और बलिदानी प्रायः 'रहस्य' होते आए हैं, जो अपमान सहकर भी कार्य करते हैं और फल/वरदान मिलने के समय ओझल (रहस्य) हो जाते हैं।

સાચો જવાબ: सुभाष बाबू का रूप, विचार, जीवन और मरण - सब कुछ एक 'रहस्य' था। उनका अप्रत्याशित रूप से भारत छोड़ना, आज़ाद हिंद फ़ौज का गठन करना और अचानक विमान दुर्घटना में गायब हो जाना; सब रहस्य ही था।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छः पंक्तियों में उत्तर दीजिए:

સાચો જવાબ: सुभाष बाबू की विमान दुर्घटना में मृत्यु की खबर सुनकर देशवासियों के मन पर गहरा आघात लगा, किंतु किसी ने भी उनकी मौत पर सचमुच विश्वास नहीं किया। भारतवासियों को लगता रहा कि वे 'रहस्य' हैं और किसी दिन, किसी वेश या देश में वापस लौट आएँगे। उनकी मृत्यु पर कुछ विरोधियों के मन से भले काँटा निकल गया हो, पर देशप्रेमी भारतीयों के हृदय में एक स्थायी पीड़ा (काँटा) चुभ गई। भारतीय मन उनका श्राद्ध करने को भी तैयार नहीं हुआ, क्योंकि उनका मानना था कि सुभाष बाबू जहाँ कहीं भी हैं, जीवित और अमर हैं।

સાચો જવાબ: विदेश से लौटकर और अनेक राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद, सुभाष चंद्र बोस ने 1938 की हरिपुरा कांग्रेस के सभापतित्व (राष्ट्रपतित्व) की गद्दी स्वयं महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और प्रमुख गांधीवादियों के हाथों व आशीर्वाद से ग्रहण की थी। यह उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक कद का ही परिणाम था कि विरोधों के बावजूद गांधीजी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना पड़ा।

સાચો જવાબ: ब ब्रिटिश सरकार और पुलिस सुभाष बाबू पर लगातार निगरानी रख रही थी, तब वे भेष बदलकर अचानक गायब हो गए। महीनों बाद उन्होंने बर्लिन और सेगाँव रेडियो से भारतवासियों को संबोधित करते हुए आज़ाद हिंद फ़ौज के गठन, अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र युद्ध की तैयारी और भारत की पूर्ण स्वतंत्रता का संदेश दिया। उन्होंने देशवासियों में यह अलख जगाई कि अब समय आ गया है जब हमें अपने प्राणों की आहुति देकर भी भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी की ज़ंजीरों से आज़ाद कराना है।
5. आशय स्पष्ट कीजिए:

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि सुभाष चंद्र बोस के जीवन का एकमात्र ध्येय भारत को स्वतंत्र कराना था। इसके लिए वे अपनी जान की परवाह किए बिना किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। जब देशघातक शक्तियाँ उन पर 'जापान का एजेंट' होने का झूठा इल्जाम लगा रही थीं, तब भी वे इन सब आरोपों और अपने मान-सम्मान की परवाह किए बिना केवल एक ही धुन में लगे थे कि चाहे उनका अपना अस्तित्व ही मिट जाए, पर "भारत तू आज़ाद हो जा।"

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि सुभाष चंद्र बोस ने निराशा और गुलामी में डूबी भारतीय जनता के मन में स्वतंत्रता की नई चेतना और उत्साह फूँक दिया था। उन्होंने अहिंसात्मक और शिथिल पड़ी राजनीति के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 'आज़ाद हिंद फ़ौज' का गठन कर भारतीय जीवन में शौर्य, वीरता और क्रांति का संचार किया। युद्ध के मैदान में सीधे अंग्रेजों से लोहा लेकर उन्होंने भारतीयों को दिखाया कि अपने हकों के लिए लड़ना और जीवित रहना क्या होता है, इसीलिए वे सभी के दिलों पर छाये हुए हैं।
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