સાચો જવાબ:
लेखक देर रात तक अपने बच्चों के घर न लौटने पर अत्यंत चिंतित हो उठते हैं। बारिश होने पर उन्हें अपनी दादी-नानी द्वारा गाया जाने वाला राम के निर्वासन का लोकगीत याद आ जाता है। लेखक कहते हैं कि 'राम का मुकुट' वस्तुतः भारतीय संस्कृति, मर्यादा, राजकीय ऐश्वर्य और मानवीय उत्कर्ष का प्रतीक है। जब-जब मानव सभ्यता या भावी पीढ़ी पर संकट आता है, तब-तब माता कौसल्या रूपी लोकमानस की चिंता जग जाती है कि कहीं राम का मुकुट, लक्ष्मण का दुपट्टा और सीता का सिंदूर भीग न जाए। लेखक सोचते हैं कि राम तो अयोध्या लौट आए, किंतु लोकमानस में उनका निर्वासन और मुकुट के भीगने का संकट आज भी बना हुआ है।