સાચો જવાબ:
इस पंक्ति में 'सूखा बरगद' नीरस, थके हुए और उत्साहहीन नौकरीपेशा इंसान के जीवन का प्रतीक है, जबकि 'हरीतिमा' (हरियाली) जीवन के उल्लास, खुशियों और नएपन का प्रतीक है। कवि अपने जीवन में किसी परिवर्तन, राहत या चमत्कार की आस में उम्मीद लगाए बैठा है, किंतु अंततः उसे कड़वा यथार्थ महसूस होता है कि उसकी इस शुष्क और नीरस ज़िंदगी में खुशियों की हरियाली भरने वाला कोई नहीं आएगा। यह पंक्ति आधुनिक मनुष्य की गहरी हताशा और अकेलेपन को व्यक्त करती है।