chapter 5

ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: शिशु सिंह के साथ बालक भरत निर्भीकता से खेल रहा था और उसके दाँत गिनना चाहता था।

સાચો જવાબ: बालक का लालन-पालन महर्षि कश्यप के आश्रम और जंगल (कानन) में हुआ।

સાચો જવાબ: बालक भरत की माता शकुंतला और पिता राजा दुष्यंत थे।

સાચો જવાબ: भारत का प्रथम साम्राज्य बालक भरत ने अपने बलशाली भुजदंडों से स्थापित किया।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए:

સાચો જવાબ: बालक भरत द्वारा सिंह के बच्चे को अपनी गोद में लेकर उसके दाँत गिनने के ढीठपन (धृष्टता) को देखकर सिंहनी गुस्से में गर्जने लगी।

સાચો જવાબ: बालक भरत ने छड़ी तानकर क्रोधित सिंहनी से कहा कि यदि तू मेरे खेल में बाधा डालेगी तो मार खाएगी और तुझे यह बच्चा भी नहीं दूँगा, इसलिए तू यहाँ से भाग जा।

સાચો જવાબ: शकुंतला दुर्भाग्यवश (दुर्दैववश) और राजा दुष्यंत के दिए गए शाप व भूल के कारण अपने पति दुष्यंत से बिछुड़ गई थी।

સાચો જવાબ: शिशु सिंह को अपनी गोद में लेकर बालक ने कहा कि अरे सिंह के बच्चे! अपना मुँह खोल, मैं देखना चाहता हूँ कि तेरे दाँत कितने कुटिल और कठोर हैं और मैं उन्हें गिनूँगा।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार-पाँच पंक्तियों में लिखिए:

સાચો જવાબ: बालक भरत बचपन से ही अत्यंत साहसी और निडर थे। वे जंगल में खूंखार शेर के बच्चे को अपनी गोद में लेकर खिलौने की तरह खेलते थे और उसका मुँह खुलवाकर उसके दाँत गिनने का दुस्साहस करते थे। जब बच्चे को बचाने के लिए सिंहनी दहाड़ती हुई आई, तो भरत ज़रा भी नहीं डरे। उन्होंने छड़ी तानकर सिंहनी को ही डाँट दिया और भाग जाने को कहा। जंगली जानवर भी उनके सहचर (साथी) थे।

સાચો જવાબ: इस कविता में कवि जयशंकर प्रसाद ने दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत की निर्भीकता और पराक्रम का वर्णन किया है। कश्यप ऋषि के आश्रम में पले-बड़े भरत बचपन में शेर के बच्चों के साथ खेलते थे। अपने भुजबल से उन्होंने भारत में प्रथम विशाल साम्राज्य की स्थापना की। भरत के नाम पर ही इस श्रेष्ठ भूमि का नाम 'भारत' पड़ा। वे देश के गौरव और भारत माता के शिरोमणि (शिररत्न) हैं।

સાચો જવાબ:

दुर्भाग्यवश अपने पति दुष्यंत से बिछड़ने के बाद शकुंतला महर्षि कश्यप के आश्रम में रहने लगी थीं। वहीं आश्रम में बालक भरत का लालन-पालन हुआ। भरत कश्यप ऋषि के गुरुकुल में शिक्षित हुए और जंगल में घूम-घूमकर बड़े हुए। जंगल के हिंसक शिशु सिंह उनके साथी थे, जिनके साथ वे बेधड़क खेलते थे। इस प्रकार प्राकृतिक और साहसी माहौल में वे अपनी माता की गोद को आनंदित करते हुए बड़े हुए।












 
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