chapter 7

ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उनके नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (C)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: प्रस्तुत कविता प्रकृति के निर्मल-निच्छल रूप, सौंदर्य तथा रोमानी परिवेश के सजीव चित्रण की दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

સાચો જવાબ: इस कविता का रचनाकाल नागार्जुन की तिब्बत-यात्रा (हिमालय दर्शन) के दौरान का समय (लगभग 1938 ई.) है।

સાચો જવાબ: कवि ने कमल को स्वर्णिम (सोने जैसे सुंदर और चमकीले) रंग का बताया है।

સાચો જવાબ: प्रस्तुत कविता में कवि ने हिमालय के प्राकृतिक सौंदर्य, मानसरोवर झील, वसंत ऋतु के प्रात:काल और जीव-जंतुओं के प्रणय-वातावरण का परिवेश प्रस्तुत किया है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में दीजिए:

સાચો જવાબ: कविता के प्रथम चरण में निर्मल और उज्ज्वल हिमालय के शिखरों पर बादलों के घिरने का दृश्य है, जहाँ मानसरोवर के स्वर्णिम कमलों पर ओस की ठंडी बूँदें मोती की तरह गिरती हैं।

સાચો જવાબ: हंस मैदानी क्षेत्रों (समतल देशों) में वर्षा ऋतु की उमस और गरमी से व्याकुल होकर शीतलता और कड़वे-मीठे कमलनाल (बिसतंतु) की खोज में हिमालय पर आते हैं।

સાચો જવાબ: बासंती सुबह में विशाल सरोवर के किनारे काई/शैवालों की हरी दरी पर पूरी रात बिछड़े रहने वाले चकवा और चकई के प्रणय-कलह (प्रेमपूर्ण क्रीड़ा/झगड़े) का दृश्य है।

સાચો જવાબ: कवि ने प्रातःकालीन बालसूर्य की किरणों को कोमल (मृदु) और उनके प्रकाश से जगमगाते हिमालय के शिखरों को स्वर्णिम/सोने जैसी आभा वाला (स्वर्णाभ) बताया है।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छः पंक्तियों में लिखिए:

સાચો જવાબ:

कवि नागार्जुन ने इस कविता में हिमालय के प्राकृतिक एवं नैसर्गिक (प्राकृतिक/स्वाभाविक) सौंदर्य का मनमोहक वर्णन किया है। स्वच्छ-धवल शिखरों पर मँडराते बादल, मानसरोवर के नीले जल में खिले स्वर्णिम कमलों पर गिरती ओस की बूँदें प्रकृति को अद्वितीय निखार देती हैं। वसंत ऋतु की भोर में उगते सूर्य की कोमल किरणों से चमकते पहाड़, मानसरोवर में तैरते हंस और शैवालों पर क्रीड़ा करते चकवा-चकई मिलकर प्रकृति के सजीव और स्वाभाविक रूप को जीवंत बनाते हैं।


સાચો જવાબ: कवि ने अपनी कविता में विविध रंगों के अद्भुत संयोजन से इन्द्रधनुषी प्रभाव पैदा किया है। उन्होंने पर्वतों के लिए 'अमल-धवल' (सफ़ेद/निर्मल), कमलों के लिए 'स्वर्णिम' (सुनहरा), जल के लिए 'श्यामल-नील' (साँवला-नीला), बालसूर्य और उसके प्रभाव से चमकीली चोटियों के लिए 'मृदु-रक्ताभ' व 'स्वर्णाभ' (लालिमायुक्त सुनहरा) तथा काई के लिए 'हरी दरी' (हरा) रंगों का सुंदर प्रयोग किया है। ये सभी रंग मिलकर दृश्य को चित्रमयी और इन्द्रधनुषी बना देते हैं।

સાચો જવાબ: इस कविता में नागार्जुन की कल्पनाशीलता और भावुकता अपने चरम पर है। उन्होंने ओस की ठंडी बूँदों को मानसरोवर के कमलों पर गिरते हुए 'शीतल मोती' के रूप में कल्पित किया है। चकवा-चकई के रात भर बिछड़ने की पौराणिक कथा को भावुकता से जोड़ते हुए उन्होंने उनके 'चिर-अभिशापित' होने का ज़िक्र किया है। सुबह होते ही उनके क्रंदन के रुकने और हरी घास की दरी पर उनके प्रणय-कलह की कल्पना कवि के संवेदनशील, रोमानी और भावुक हृदय का परिचय देती है।
5. आशय स्पष्ट कीजिए:

સાચો જવાબ: इन पंक्तियों का आशय यह है कि वसंत ऋतु की प्रात:काल में सुबह के बालसूर्य (उगते हुए लाल सूर्य) की कोमल और सुनहरी किरणें चारों ओर फैल रही थीं। उन किरणों के स्पर्श से हिमालय की बर्फीली चोटियाँ अगल-बगल सोने की तरह चमकती हुई (स्वर्णाभ) अत्यंत मनमोहक प्रतीत हो रही थीं।
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