ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl
कवि नागार्जुन ने इस कविता में हिमालय के प्राकृतिक एवं नैसर्गिक (प्राकृतिक/स्वाभाविक) सौंदर्य का मनमोहक वर्णन किया है। स्वच्छ-धवल शिखरों पर मँडराते बादल, मानसरोवर के नीले जल में खिले स्वर्णिम कमलों पर गिरती ओस की बूँदें प्रकृति को अद्वितीय निखार देती हैं। वसंत ऋतु की भोर में उगते सूर्य की कोमल किरणों से चमकते पहाड़, मानसरोवर में तैरते हंस और शैवालों पर क्रीड़ा करते चकवा-चकई मिलकर प्रकृति के सजीव और स्वाभाविक रूप को जीवंत बनाते हैं।