chapter 9

ધોરણ 12 | విષય: Hindi sl

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए:

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (B)

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (A)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: घर नदियों के किनारे बने हुए हैं।

સાચો જવાબ: चीड़ के वृक्षों (दरख्तों) के तने बहुत नाजुक और कोमल हैं।

સાચો જવાબ: कवि ने सभा में उपस्थित आम जनता (स्वयं) को झुनझुना कहा है।

સાચો જવાબ: कवि अभी कालीन नहीं देखना चाहता क्योंकि उसके पाँव अभी अभावों और समस्याओं रूपी कीचड़ में सने हुए हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन पंक्तियों में लिखिए:

સાચો જવાબ: कवि को चिंता इसलिए है क्योंकि सामने विनाशकारी बाढ़ आने की प्रबल संभावनाएँ दिखाई दे रही हैं, और लोगों के आशियाने (घर) सीधे नदियों के किनारे बने हुए हैं जो बाढ़ में कभी भी बह सकते हैं।

સાચો જવાબ: चीड़ के पेड़ों के तने बहुत कमजोर और नाजुक होते हैं। यदि चीड़-वन में तेज आँधियाँ आएँगी, तो वे कमजोर पेड़ तिनके की तरह टूटकर गिर जाएँगे और भारी तबाही मच जाएगी।

સાચો જવાબ: आदमी को झुनझुना कहने का तात्पर्य यह है कि भ्रष्ट और शोषक व्यवस्था में आम आदमी की अपनी कोई आवाज़ या अधिकार नहीं रह गया है; सत्ताधारी लोग जनता को खिलौने (झुनझुने) की तरह अपनी मर्जी से इस्तेमाल करते और नचाते हैं।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार-पाँच पंक्तियों में लिखिए:

સાચો જવાબ: कवि के साथ यात्रा कर रहे सहयात्री (देश की जनता) आलस्य, निराशा और उपेक्षा में डूबे हुए हैं, वे परिस्थितियों से हताश होकर ऊँघ रहे हैं। कवि उनकी इस निष्क्रियता और उदासीनता को दूर करना चाहता है। इसलिए वह ऐसी तीव्र, ओजस्वी और चेतना जगाने वाली ('तड़पती-सी') ग़ज़ल सुनाना चाहता है, जिससे सोए हुए लोगों में जागृति, स्फूर्ति और क्रांति का नया संचार हो सके और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर सकें।

સાચો જવાબ: इस ग़ज़ल का केंद्रीय भाव समसामयिक सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर करारा प्रहार करना तथा सोई हुई जन-चेतना को जगाना है। कवि दुष्यंत कुमार समाज में व्याप्त संकटों (बाढ़), कमजोर शासन-व्यवस्था (चीड़ के नाजुक तने), आम आदमी की लाचारी (झुनझुना) और सामाजिक विषमता (कालीन बनाम कीचड़ में सने पाँव) को रेखांकित करते हैं। विषम परिस्थितियों और संकटों के बावजूद कवि हताश नहीं हैं; वे एक तड़पती हुई ग़ज़ल के माध्यम से जन-सामान्य में सोई हुई क्रांति की उम्मीद और ऊर्जा को पुनर्जीवित करना चाहते हैं।
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