ધોરણ 6 | విષય: Hindi ds
(1) मेरे पास एक बड़ी संदूक है।
गलत → सुधार: मेरे पास एक बड़ा संदूक है। ('संदूक' पुल्लिंग है)
(2) मैंने अहमदाबाद से अंबाजी की टिकट ली।
गलत → सुधार: मैंने अहमदाबाद से अंबाजी का टिकट लिया। ('टिकट' पुल्लिंग है)
(3) रावण के साथ युद्ध में राम का विजय हुआ।
गलत → सुधार: रावण के साथ युद्ध में राम की विजय हुई। ('विजय' स्त्रीलिंग है)
(4) मैंने पुस्तक खरीदी।
सही
(5) रमेश की स्कूल विशाल है।
गलत → सुधार: रमेश का स्कूल विशाल है। ('स्कूल' पुल्लिंग है)
(6) आपकी आवाज़ मधुर है।
सही
(7) रोहन को क्रिकेट खेलने में बड़ी मज़ा आती है।
गलत → सुधार: रोहन को क्रिकेट खेलने में बड़ा मज़ा आता है। ('मज़ा' पुल्लिंग है)
(8) हमें पौष्टिक खुराक लेना चाहिए।
गलत → सुधार: हमें पौष्टिक खुराक लेनी चाहिए। ('खुराक' स्त्रीलिंग है)
(9) मैंने एक सुंदर तसवीर देखा।
गलत → सुधार: मैंने एक सुंदर तसवीर देखी। ('तसवीर' स्त्रीलिंग है)
(10) आज भारी बरसात हुआ।
गलत → सुधार: आज भारी बरसात हुई। ('बरसात' स्त्रीलिंग है)
(1) लड़के मैदान में खेल रहे हैं।
→ लड़का मैदान में खेल रहा है।
(2) आकाश में पक्षी उड़ रहे हैं।
→ आकाश में पक्षी उड़ रहा है। (नोट: 'पक्षी' का एकवचन और बहुवचन रूप समान रहता है, क्रिया में परिवर्तन होता है)
(3) मैंने आज एक व्यक्ति की मदद की।
→ हमने आज कई व्यक्तियों की मदद की।
(4) उद्यान में हरा-भरा पेड़ है।
→ उद्यान में हरे-भरे पेड़ हैं।
(5) मेरी किताब वापस दीजिए।
→ मेरी किताबें वापस दीजिए।
(1) "अंधा है क्या? देखकर नहीं चलता। मेरे कप टूट गए।"
उत्तर: यह वाक्य चायवाला बालक एक अन्य बालक (अख़बार पढ़ने वाले) से कहता है।
(2) "जीते रहो बेटा। भगवान तुम्हें अच्छे नंबर से उत्तीर्ण करे।"
उत्तर: यह वाक्य बूढ़ा अंधा भिखारी विद्यार्थी (देवेन्द्र) से कहता है।
(3) "चलो बाबा तुम्हें अस्पताल तक पहुँचा दूँ।"
उत्तर: यह वाक्य विद्यार्थी (देवेन्द्र) बूढ़े भिखारी से कहता है।
(4) "सर! परीक्षा शुरू हो गई और देवेन्द्र अभी तक अनुपस्थित है।"
उत्तर: यह वाक्य अध्यापक प्रधानाध्यापक से कहते हैं।
(5) "शाबाश! तुमने यह जानते हुए भी कि परीक्षा का समय है, अपना कर्तव्य निभाया।"
उत्तर: यह वाक्य प्रधानाध्यापक देवेन्द्र से कहते हैं।
(6) "जूते चमका दूँ, शानदार कर दूँगा।"
उत्तर: यह वाक्य बूट पालिशवाला बालक राहगीर से कहता है।
अनुवाद:
એક વાર અવંતીના દેશમાં ત્રણ વેપારીઓ આવ્યા. રાજદરબારમાં તેમણે વિનંતી કરી કે તેમના પ્રશ્નોના ઉત્તર આપવામાં આવે. કોઈ પણ દરબારી વેપારીઓના પ્રશ્નોના ઉત્તર આપી શક્યો નહીં. ત્યાં સુધી કે રાજા પણ મૂંઝવણમાં પડી ગયા. ત્યારે કોઈએ કહ્યું કે અવંતીને બોલાવવામાં આવે, તે જ આ પ્રશ્નોના ઉત્તર આપી શકે છે. રાજાએ અવંતીને બોલાવવાની આજ્ઞા આપી. હાથમાં લાકડી લઈને પોતાના ગધેડા પર સવાર થઈને અવંતી દરબારમાં પહોંચ્યો.