ધોરણ 7 | విષય: Hindi
सत्य × असत्य
आदर × अनादर
प्रेम × नफ़रत
बड़ा × छोटा
अच्छा × बुरा
दूर × नजदीक
परकाज × स्वकाज
जीवित × मृत
(1) सत्य: गांधीजी हमेशा सत्य बोलते थे।
(2) असत्य: हमें कभी असत्य नहीं बोलना चाहिए।
(3) आदर: हमें बड़ों का आदर करना चाहिए।
(4) अनादर: किसी का भी अनादर करना अच्छी बात नहीं है।
(5) प्रेम: हमें सब से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।
(6) नफ़रत: मन में किसी के प्रति नफ़रत नहीं रखनी चाहिए।
(7) बड़ा: खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है।
(8) छोटा: हमें किसी भी इंसान को छोटा नहीं समझना चाहिए।
(9) अच्छा: राम एक अच्छा लड़का है।
(10) बुरा: बुरा काम करने का नतीजा बुरा होता है।
(11) दूर: स्कूल मेरे घर से दूर है।
(12) नजदीक: मेरा मित्र मेरे घर के बहुत नजदीक रहता है।
(13) परकाज: सज्जन लोग परकाज (दूसरों के काम) के लिए धन का संग्रह करते हैं।
(14) स्वकाज: केवल स्वकाज में लगे रहना स्वार्थ है।
(15) जीवित: जल के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता।
(16) मृत: मृत जानवरों की खाल से भी लोहार धौंकनी बनाता है।
भावार्थ: कबीरदास जी कहते हैं कि साधु या सज्जन पुरुष का स्वभाव अनाज साफ करने वाले सूप जैसा होना चाहिए। जैसे सूप अनाज (सार-तत्व) को अपने पास रख लेता है और कचरे/फूस (थोथा) को उड़ा देता है, वैसे ही सज्जन व्यक्ति को दुनिया की अच्छी बातों को ग्रहण कर व्यर्थ की बुराइयों को त्याग देना चाहिए।
भावार्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि गरीब की बददुआ (हाय) कभी भी निष्फल (खाली) नहीं जाती। जिस प्रकार मरे हुए जानवर (ढोर) की चमड़ी से बनी धौंकनी की हवा से भी लोहा जैसी कठोर धातु पिघलकर राख बन जाती है, उसी प्रकार गरीब की हाय से अत्याचारी का विनाश निश्चित हो जाता है।
भावार्थ: रहीम जी कहते हैं कि बड़े या अमीर लोगों को देखकर छोटे या गरीब लोगों का उपेक्षा/अनादर नहीं करना चाहिए। क्योंकि जिस जगह छोटी-सी सुई काम आती है (जैसे कपड़े सीने में), वहाँ बड़ी तलवार किसी काम की नहीं होती। हर छोटी और बड़ी वस्तु का अपना अलग महत्त्व होता है।