chapter 8

ધોરણ 7 | విષય: Hindi

अभ्यास
1. निम्नलिखित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा और बड़ा होता है, लेकिन न तो वह राहगीरों (यात्रियों) को छाया दे पाता है और न ही उसके फल आसानी से पहुँच में होते हैं (वे बहुत दूर लगते हैं)। ठीक इसी तरह, यदि कोई व्यक्ति बहुत धनवान या बड़ा होकर भी किसी की मदद नहीं करता, तो उसका बड़ा होना व्यर्थ है। इसलिए खजूर के पेड़ का उदाहरण दिया गया है।

સાચો જવાબ: साधु (सज्जन) पुरुष सूप (अनाज फटकने के छाज) के स्वभाव जैसा होना चाहिए। क्योंकि सूप काम की और अच्छी चीज़ों (अनाज) को अपने पास रख लेता है और व्यर्थ कचरे को उड़ा देता है। उसी प्रकार साधु को भी अच्छी बातें ग्रहण करनी चाहिए और बुराई को त्याग देना चाहिए।

સાચો જવાબ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इस संसार में तरह-तरह के लोग रहते हैं। जिस प्रकार नदी और नाव का संयोग अनिश्चित होता है और वे एक साथ मिलकर चलते हैं, उसी प्रकार हमें भी समाज में शांति और सुखपूर्वक जीने के लिए सबके साथ हिल-मिलकर (प्रेम से) रहना चाहिए।

સાચો જવાબ: हम गरीब लोगों को उनकी ज़रूरत के अनुसार भोजन, पुराने कपड़े, किताबें और पढ़ाई की सामग्री देकर मदद कर सकते हैं। साथ ही बीमार होने पर उन्हें दवाइयाँ या आर्थिक सहायता देकर भी मदद की जा सकती है।

સાચો જવાબ: सज्जन (चतुर) लोग अपनी संपत्ति का उपयोग अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई (परमार्थ और समाज सेवा) के लिए करते हैं; जैसे पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते।

સાચો જવાબ:

[विलोम शब्दों के जोड़े]:





  1. सत्य × असत्य




  2. आदर × अनादर




  3. प्रेम × नफ़रत




  4. बड़ा × छोटा




  5. अच्छा × बुरा




  6. दूर × नजदीक




  7. परकाज × स्वकाज




  8. जीवित × मृत





[उदाहरण के अनुसार वाक्य प्रयोग]:





  • (1) सत्य: गांधीजी हमेशा सत्य बोलते थे।



    (2) असत्य: हमें कभी असत्य नहीं बोलना चाहिए।




  • (3) आदर: हमें बड़ों का आदर करना चाहिए।



    (4) अनादर: किसी का भी अनादर करना अच्छी बात नहीं है।




  • (5) प्रेम: हमें सब से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।



    (6) नफ़रत: मन में किसी के प्रति नफ़रत नहीं रखनी चाहिए।




  • (7) बड़ा: खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है।



    (8) छोटा: हमें किसी भी इंसान को छोटा नहीं समझना चाहिए।




  • (9) अच्छा: राम एक अच्छा लड़का है।



    (10) बुरा: बुरा काम करने का नतीजा बुरा होता है।




  • (11) दूर: स्कूल मेरे घर से दूर है।



    (12) नजदीक: मेरा मित्र मेरे घर के बहुत नजदीक रहता है।




  • (13) परकाज: सज्जन लोग परकाज (दूसरों के काम) के लिए धन का संग्रह करते हैं।



    (14) स्वकाज: केवल स्वकाज में लगे रहना स्वार्थ है।




  • (15) जीवित: जल के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता।



    (16) मृत: मृत जानवरों की खाल से भी लोहार धौंकनी बनाता है।




સાચો જવાબ: अकाल (सूखे) के समय परेशान लोगों की मदद करने के लिए हम अपने स्तर पर तथा मित्रों के साथ मिलकर राहत कोष इकट्ठा करेंगे। हम उनके लिए पीने के पानी के टैंकरों की व्यवस्था करवाएँगे, सूखा अनाज और भोजन सामग्री बाँटेंगे। साथ ही मवेशियों (पशु-पक्षियों) के लिए चारे और पानी की व्यवस्था करेंगे तथा सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं से संपर्क करके अकाल पीड़ित क्षेत्र में जल्द से जल्द मदद पहुँचाने का प्रयास करेंगे।
4. निम्नलिखित दोहों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए :

સાચો જવાબ:


  • भावार्थ: कबीरदास जी कहते हैं कि साधु या सज्जन पुरुष का स्वभाव अनाज साफ करने वाले सूप जैसा होना चाहिए। जैसे सूप अनाज (सार-तत्व) को अपने पास रख लेता है और कचरे/फूस (थोथा) को उड़ा देता है, वैसे ही सज्जन व्यक्ति को दुनिया की अच्छी बातों को ग्रहण कर व्यर्थ की बुराइयों को त्याग देना चाहिए।




સાચો જવાબ:


  • भावार्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि गरीब की बददुआ (हाय) कभी भी निष्फल (खाली) नहीं जाती। जिस प्रकार मरे हुए जानवर (ढोर) की चमड़ी से बनी धौंकनी की हवा से भी लोहा जैसी कठोर धातु पिघलकर राख बन जाती है, उसी प्रकार गरीब की हाय से अत्याचारी का विनाश निश्चित हो जाता है।




સાચો જવાબ:


  • भावार्थ: रहीम जी कहते हैं कि बड़े या अमीर लोगों को देखकर छोटे या गरीब लोगों का उपेक्षा/अनादर नहीं करना चाहिए। क्योंकि जिस जगह छोटी-सी सुई काम आती है (जैसे कपड़े सीने में), वहाँ बड़ी तलवार किसी काम की नहीं होती। हर छोटी और बड़ी वस्तु का अपना अलग महत्त्व होता है।




स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

સાચો જવાબ: साधु सूप के स्वभाव जैसा होना चाहिए जो अच्छी और काम की बातों (सार) को ग्रहण करे और व्यर्थ की बातों को छोड़ दे।

સાચો જવાબ: कबीर जी कहते हैं कि जिस प्रकार मक्खी गुड़ के लालच में उसमें बैठ जाती है और उसके पंख लिपट जाते हैं, फिर वह छूट नहीं पाती और तड़प-तड़पकर मर जाती है; ठीक उसी प्रकार लालच मनुष्य का विनाश कर देता है। इसीलिए लालच को बुरी बलाय (आफत) कहा गया है।

સાચો જવાબ: तुलसीदास जी कहते हैं कि संसार में विविध प्रकार के स्वभाव वाले लोग रहते हैं। आपस में मिल-जुलकर रहने से जीवन सुखमय बनता है और शत्रुता नहीं बढ़ती, इसलिए हमें नदी और नाव के संयोग की तरह सबके साथ हिल-मिलकर रहना चाहिए।

સાચો જવાબ: 'गरीब की हाय' के लिए मरे हुए जानवर की चमड़ी से बनी लोहार की 'धौंकनी' का उदाहरण दिया गया है, जिसकी फूंक से कठोर लोहा भी जलकर भस्म हो जाता है।

સાચો જવાબ: रहीम जी प्रेम के धागे को झटका देकर तोड़ने से मना करते हैं क्योंकि एक बार प्रेम का संबंध टूट जाने पर वह आसानी से नहीं जुड़ता; और यदि जुड़ भी जाए तो उसमें अविश्वास की 'गाँठ' पड़ जाती है।
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