ધોરણ 8 | విષય: Hindi
सुनीता ने अंतरिक्ष में निम्नलिखित रिकॉर्ड बनाए:
उन्होंने 29 घंटे 17 मिनट तक 'स्पेसवॉक' (अंतरिक्ष में चहलकदमी) करने का रिकॉर्ड बनाया।
अंतरिक्ष के बोस्टन मैराथन में साढ़े चार घंटे में 42 किलोमीटर का सफर काटने वाली वे पहली अंतरिक्ष यात्री बनीं।
उन्होंने अंतरिक्ष में 188 दिन और चार घंटे रहने के शैनोन ल्यूसिक के रिकॉर्ड को तोड़कर सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बनाया।
अंतरिक्ष यात्रा और स्पेस स्टेशन में ज़िंदगी बहुत कठिन होती है। वहाँ निम्नलिखित मुश्किलें आती हैं:
वहाँ खाने से लेकर नहाने तक की सभी दैनिक क्रियाएँ बहुत कठिन होती हैं।
भारहीनता (शून्य गुरुत्वाकर्षण) के कारण हवा में तैरना पड़ता है और सोने में बड़ी मुश्किल होती है।
शरीर का लचीलापन तेज़ी से खत्म होने लगता है तथा मांसपेशियों और हड्डियों को भारी क्षति पहुँचती है, जिससे वे कमज़ोर हो जाती हैं।
पृथ्वी पर लौटने के बाद शुरुआती दिनों में चलने-फिरने में भारी दिक्कत होती है और दिमाग को सामान्य होने में समय लगता है।
इंदिरा गांधी: ये हमारे देश भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं। इन्हें अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहसिक फैसलों के कारण 'आयरन लेडी' (लोह महिला) के नाम से जाना जाता है। उन्होंने देश के विकास और प्रगति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सानिया मिर्जा: ये भारत की एक बेहद प्रसिद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीतकर भारत का नाम खेल जगत में ऊँचा किया और देश की लाखों लड़कियों को खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
किरण बेदी: ये भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने वाली भारत की प्रथम महिला अधिकारी हैं। उन्होंने पुलिस विभाग और जेल सुधारों (विशेषकर तिहाड़ जेल) में क्रांतिकारी कार्य किए। वे अपनी ईमानदारी और जांबाजी के लिए जानी जाती हैं।
मल्लिका साराभाई: ये भारत की एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना (भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी) तथा अभिनेत्री हैं। वे प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई और नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई की बेटी हैं। उन्होंने नृत्य के माध्यम से सामाजिक समस्याओं को उजागर करने का कार्य किया है।
कल्पना चावला: ये भारतीय मूल की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री थीं। हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपार सफलता प्राप्त की। वर्ष 2003 में अंतरिक्ष से लौटते समय हुए हादसे में वे शहीद हो गईं, लेकिन वे आज भी युवाओं की प्रेरणास्रोत हैं।
पी. टी. ऊषा: इन्हें भारत की 'उड़न परी' (पय्योली एक्सप्रेस) कहा जाता है। ये भारत की महान महिला धाविका (एथलीट) हैं, जिन्होंने एशियाई खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए ढेरों स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।
(पाठ्यपुस्तक में दिए गए फूल/प्रकृति के सुंदर चित्र को ध्यान में रखते हुए काव्य रचना)
उत्तर:
कितना सुंदर प्यारा फूल, हवा में खाए सुंदर झूल। खुशबू अपनी यह फैलाता, तितली को पास बुलाता। काँटों में भी मुस्काता है, जीने की राह दिखाता है। हे प्रभु! हमको ऐसा ज्ञान दो, फूलों जैसा सुंदर जीवन दो।
(दिए गए परिच्छेद को बिना किसी गलती के सुंदर और शुद्ध लिखावट में लिखना ही अनुलेखन है)
उत्तर (अनुलेखन): कुछ नया करने की लगन और उत्साह हो तो लक्ष्य तक पहुँचने से कोई रोक नहीं सकता। बचपन से ही सितारों की सैर का सपना देखनेवाली कल्पना अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के बाद चाँद पर उतरना चाहती थी। बचपन से ही उसके मन में अंतरिक्ष यात्री बनने की धुन सवार थी । एक बातचीत में कल्पना ने कहा था, “मैं बचपन से जिस क्षेत्र में जाना चाहती थी, वहाँ पहुँचने के लिए मैंने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया । "