ધોરણ 8 | విષય: Hindi
"युग-युग के मुरझे सुमनों में नयी-नयी मुस्कान भरो। उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो ॥"
आशय: इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि सदियों से अज्ञानता, ग़रीबी, लाचारी और निराशा के कारण जिन देशवासियों (सुमन रूपी मनुष्यों) का जीवन मुरझा गया है, उनके जीवन में नई आशा, उत्साह और खुशियाँ भरनी हैं। हे देश के अमर सपूतों! उठो और अपने देश का एक नया और सुंदर निर्माण करो।
राष्ट्रीय संपत्ति: सार्वजनिक इमारतें, ऐतिहासिक स्मारक, रेलवे, बसें, नदियाँ, बाग-बगीचे, सरकारी पुस्तकालय और विद्यालय हमारी राष्ट्रीय संपत्ति हैं।
सुरक्षा के लिए हम क्या कर सकते हैं:
हम सार्वजनिक संपत्ति को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाएँगे और न ही किसी को ऐसा करने देंगे।
दीवारों और ऐतिहासिक स्मारकों पर कचरा या गंदगी नहीं फैलाएँगे।
बिजली और पानी का अपव्यय रोकेंगे तथा पर्यावरण (पेड़-पौधों) की रक्षा करेंगे।