chapter 8

ધોરણ 8 | విષય: Hindi

अभ्यास
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

સાચો જવાબ: राहुल के पिताजी (राजकुमार सिद्धार्थ) बड़े सवेरे (प्रातःकाल) उपवन (बगीचे) में भ्रमण कर रहे थे।

સાચો જવાબ: आखेटक (शिकारी) ने अपने तीर से घायल हुए और गिराए गए हंस (आहत पक्षी) को राहुल के पिताजी से माँगा

સાચો જવાબ: उपवन में तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल खिले थे। फूलों की पत्तियों पर ओस की बूँदें चमक रही थीं। हवा के हल्के झोंकों से तालाब का पानी लहरा रहा था और पक्षी कल-कल मधुर स्वर में चहक रहे थे। उपवन में चारों ओर मनमोहक सुगंध फैली हुई थी।

સાચો જવાબ: माँ से कहानी सुनकर बालक राहुल ने यह निर्णय सुनाया कि दया ही सबसे बड़ा न्याय है। यदि कोई किसी निरपराध को मारे, तो दूसरों का धर्म है कि वह उसे बचाए। मारने वाले से बचाने वाला हमेशा बड़ा होता है।

સાચો જવાબ: इस कथा काव्य में बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से एक कहानी सुनाने का हठ करता है। माँ उसे उसके पिता सिद्धार्थ के जीवन की घटना सुनाती है। एक दिन प्रातःकाल उपवन में टहलते समय सिद्धार्थ को बाण से बींधा हुआ एक घायल हंस मिलता है। वे दया करके उसे उठा लेते हैं और बचा लेते हैं। तभी शिकारी आकर अपने शिकार (हंस) पर अधिकार जताता है। दोनों में विवाद होता है और मामला न्यायालय में जाता है। अंत में न्याय यही होता है कि "मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है", इसलिए हंस सिद्धार्थ को दे दिया जाता है।

સાચો જવાબ:

(1) लड़की ने नई सलवार पहनी है।





  • वचन परिवर्तन (लड़की ➔ लड़कियों): लड़कियों ने नई सलवारें पहनी हैं।





(2) अध्यापक ने छात्र को कहानी सुनाई।





  • वचन परिवर्तन (छात्र ➔ छात्रों, कहानी ➔ कहानियाँ): अध्यापक ने छात्रों को कहानियाँ सुनाईं।





(3) प्रधानमंत्री ने अपने मंत्री से देश की समस्या पर बातचीत की।





  • वचन परिवर्तन (मंत्री ➔ मंत्रियों, समस्या ➔ समस्याओं): प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों से देश की समस्याओं पर बातचीत की।





(4) इस पत्रिका में जो कविता छपी है, वह बहुत मनोरंजक है।





  • वचन परिवर्तन (पत्रिका ➔ पत्रिकाओं, कविता ➔ कविताएँ): इन पत्रिकाओं में जो कविताएँ छपी हैं, वे बहुत मनोरंजक हैं।





(5) लू चलने के कारण लता सूख गई है।





  • वचन परिवर्तन (लता ➔ लताएँ): लू चलने के कारण लताएँ सूख गई हैं।




स्वाध्याय

સાચો જવાબ:

(1) "वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे..."





  • भावार्थ: माँ यशोधरा कहती हैं कि उपवन में भाँति-भाँति के सुंदर रंग-बिरंगे फूल खिले थे और उन पर ओस की बूँदें चमक रही थीं। मंद-मंद हवा के झोंकों से पानी में तरंगें उठ रही थीं। बालक राहुल सुनकर कहता है— हाँ माँ, मुझे यही कहानी सुननी है।





(2) "तू है हठी, मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सवेरे..."





  • भावार्थ: माँ यशोधरा अपने प्रिय पुत्र राहुल से कहती हैं कि हे मेरे प्यारे हठी बच्चे! सुन, एक दिन सुबह-सुबह तेरे पिता बगीचे में घूम रहे थे, जहाँ चारों तरफ़ मनमोहक सुगंध फैली हुई थी।




સાચો જવાબ:

माँ मुझको भी पौधा दे दे,



मैं भी वृक्ष लगाऊँगा।



रोज़ पिलाऊँगा इसको पानी,



इसकी सेवा मैं कर जाऊँगा।



जब यह बड़ा पेड़ बन जाएगा,



ठंडी छाया हमको देगा।



फल और फूल पकाने को,



सुंदर-सुंदर रंग बिखराएगा।


સાચો જવાબ:

कहानी: एक दिन अकबर ने बीरबल से पूछा— "बीरबल, दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली कौन है?"



बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया— "जहाँपनाह! दुनिया में सबसे शक्तिशाली एक छोटा सा निष्पाप बच्चा होता है।" अकबर को इस बात पर आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा— "यह कैसे संभव है? एक बच्चा राजा से भी अधिक शक्तिशाली कैसे हो सकता है?"



बीरबल अगले दिन दरबार में एक छोटे बच्चे को लेकर आए। बच्चे को देखकर सम्राट अकबर का मन पिघल गया और उन्होंने उसे अपनी गोद में उठा लिया। खेलते-खेलते बच्चे ने अचानक अकबर की मूँछ पकड़कर खींच दी। दरबार में सन्नाटा छा गया। बीरबल मुस्कुराए और बोले— "हुज़ूर! इस दुनिया में किसकी हिम्मत है जो आपकी मूँछों को हाथ भी लगा सके? लेकिन इस छोटे बच्चे ने आपकी मूँछ उखाड़ ली और आप इसे सजा देने के बजाय मुस्कुरा रहे हैं। इसीलिए बच्चा ही दुनिया में सबसे शक्तिशाली है।" सम्राट अकबर बीरबल की बुद्धिमानी देखकर हँस पड़े।


સાચો જવાબ:

यदि मेरी पाठशाला के सामने कोई दुर्घटना हो जाए, तो मैं तुरंत बिना घबराए निम्नलिखित कदम उठाऊँगा:





  1. अपने शिक्षकों और स्कूल के सुरक्षा गार्ड को तुरंत दुर्घटना की सूचना दूँगा।




  2. यदि किसी को चोट लगी हो तो प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) देने की व्यवस्था करूँगा और 108 नंबर पर एम्बुलेंस बुलाऊँगा।




  3. दुर्घटना स्थल पर भीड़ नहीं जमने दूँगा ताकि घायल को ताज़ा हवा मिल सके।




સાચો જવાબ:

कहानी (सार रूप में): प्राचीन काल में राजकुमार सिद्धार्थ अपनी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल के साथ रहते थे। सिद्धार्थ दयालु स्वभाव के थे। एक दिन सुबह जब वे बगीचे में टहल रहे थे, तभी आकाश से तीर से बिंधा हुआ एक घायल हंस उनके सामने आ गिरा। सिद्धार्थ ने दया करके तीर निकाला और हंस की जान बचाई।



तभी शिकार करने वाला देवदत्त वहाँ पहुँचा और हंस पर अपना अधिकार जताने लगा। सिद्धार्थ ने कहा कि मैंने इसे बचाया है, इसलिए यह मेरा है। विवाद न्याय के लिए राजदरबार में पहुँचा। राजा ने निर्णय सुनाया कि मारने वाले से बचाने वाले का अधिकार बड़ा होता है, इसलिए हंस सिद्धार्थ को दे दिया गया। आगे चलकर यही सिद्धार्थ भगवान बुद्ध कहलाए।


```php
Warning: session_start(): Session cannot be started after headers have already been sent in /home/u367000040/domains/gyanistudent.in/public_html/footer.php on line 8
```