chapter 1

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :

સાચો જવાબ: कवि नित्य ऐसी आराधना चाहते हैं जिसमें सत्य, शिव और सुंदर (सत्य, सुंदर और मांगल्य) की भावना हो।

સાચો જવાબ: कवि मनोकामना चाहते हैं कि दुखियारों का दुःख दूर हो जाए।

સાચો જવાબ: कवि दुर्बलों के रक्षणार्थ पौरुष (पुरुषार्थ और शक्ति) की साधना चाहते हैं।

સાચો જવાબ: कवि अभ्यर्थना करते हैं कि सभी लोग शौर्य और धैर्य प्राप्त करें।

સાચો જવાબ: कवि ऐसी बंधुता की कामना करते हैं जिसमें सभी लोग मुक्त हों, और आपस में कोई भेदभाव या वैरभाव न हो।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

સાચો જવાબ: कवि ऐसे मांगल्य की आराधना करते हैं जिसमें सबका कल्याण हो, लोगों के मन में सत्य और सुंदरता के प्रति आस्था हो और किसी का अहित न हो।

સાચો જવાબ: कवि के अनुसार उन सभी दुखियारे और लाचार लोगों के दुःख दूर होने चाहिए जो कष्ट में हैं, ताकि समाज में कोई भी व्यक्ति दुःखी न रहे।

સાચો જવાબ: कवि की यह अभ्यर्थना (प्रार्थना) है कि समाज के सभी लोगों के जीवन में नया प्रकाश (नवतेज) आए, सबके दिलों में सुंदर भावनाएँ हों, मानवता की पूजा हो और सबमें शौर्य व धैर्य का संचार हो।

સાચો જવાબ: कवि भेदों को नाश करने की बात इसलिए करते हैं ताकि मनुष्य-मनुष्य के बीच ऊंच-नीच, जाति-पाति और वैर-वासना की दीवारें गिर सकें और संपूर्ण विश्व में मानवों की एकता व सच्चे विश्वबन्धुत्व की स्थापना हो सके।
3. निम्नलिखित काव्यपंक्तिओं का आशय स्पष्ट कीजिए :

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि कवि अपने तन (देह) और मन (चित्त) दोनों से केवल एक ही प्रार्थना करते हैं कि संसार में हमेशा सत्य, शिव और सुंदर का वास हो। लोगों का कर्म और विचार हमेशा दूसरों के कल्याण (मांगल्य) के लिए ही समर्पित रहे।

સાચો જવાબ: इस पंक्ति का आशय यह है कि समाज में फैले हुए जाति, धर्म और वर्ग के सभी भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो जाएँ। लोगों के मन से दुश्मनी (बैर) और बुरी इच्छाएँ (वासना) मिट जाएँ, जिससे पूरी मानवता एक हो सके। हम स्वतंत्र होकर भी आपस में भाईचारे (बंधुता) की भावना से जुड़े रहें।

સાચો જવાબ:

(1) देहमंदिर चित्तमंदिर एक ही है प्रार्थना ।



सत्य - सुंदर मांगल्य की नित्य हो आराधना ॥



दुखियारों का दुःख जाए, है यही मनकामना ।



वेदना को परख पाने जगाएँ संवेदना ॥



दुर्बलों के रक्षणार्थ पौरुष की साधना ॥



(2) जीवन में नवतेज हो, अंतरंग में भावना ।



सुंदरता की आस हो मानवता की हो उपासना ॥



शौर्य पावें, धैर्य पावें, यही है अभ्यर्थना ॥



भेद सभी अस्त होवें, वैर और वासना ॥



मानवों की एकता की पूर्ण हो कल्पना ।



मुक्त हम, चाहें एक ही बंधुता की कामना ॥


સાચો જવાબ:

(1) दुःख  सुख



(2) जीवन ×मरण / मृत्यु



(3) सत्य× असत्य



(4) सुंदर ×कुरूप



(5) अस्त × उदय


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