chapter 10

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-दो वाक्य में उत्तर दीजिए

સાચો જવાબ: भारत में अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा हुआ है, यहाँ मनमोहक हिमालय पर्वत और पवित्र गंगा जल बहता है, इसलिए भारत को प्रकृति का पुण्य लीला-स्थल कहा गया है।

સાચો જવાબ: भारतवर्ष संसार का सबसे प्राचीन (पुरातन) देश है और सभ्यता-संस्कृति की शुरुआत यहीं से हुई है, इसीलिए इसे 'वृद्ध' (प्राचीन) कहा गया है।

સાચો જવાબ: विधाता (ब्रह्मा) ने मानव-सृष्टि (नर-सृष्टि) का सबसे पहला विस्तार भारतवर्ष की इस पवित्र भूमि से ही किया है।

સાચો જવાબ: विधाता (ब्रह्मा) ने मानव-सृष्टि (नर-सृष्टि) का सबसे पहला विस्तार भारतवर्ष की इस पवित्र भूमि से ही किया है।

સાચો જવાબ: आर्य संसार भर के लोगों के लिए विद्या, ज्ञान, कला और कौशल के प्रथम आचार्य (शिक्षक) थे।

સાચો જવાબ: आर्यों की संतान आज अवनति और दयनीय दशा (अधोगति) में जी रही है, फिर भी उनके महान अतीत के कुछ चिह्न आज भी मौजूद हैं।

સાચો જવાબ: आर्य कभी केवल अपने लिए नहीं जीते थे, वे स्वार्थ और मोह से दूर रहते थे तथा उनका पूरा जीवन संसार के उपकार और कल्याण के लिए समर्पित होता था।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए

સાચો જવાબ: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने भारत के अतीत का अत्यंत गौरवशाली चित्रण किया है। वे भारत को संपूर्ण संसार का सिरमौर और विधाता की महान रचना मानते हैं। भारत वह पवित्र ऋषिभूमि है जहाँ हिमालय जैसी महान पर्वतमाला और गंगा जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं। संसार में ज्ञान, विद्या, कला और कौशल का प्रकाश सबसे पहले भारत से ही फैला। ईश्वर ने अपनी महान सिद्धियों और वैभव का पहला भंडार भारत को ही बनाया। गुप्तजी ने भारत को संसार का गुरु और श्रेष्ठ सभ्यता के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत किया है।

સાચો જવાબ: गुप्तजी कहते हैं कि भारत के मूल निवासी आर्य हैं, जो संपूर्ण विश्व के प्रथम आचार्य रहे हैं। उन्होंने दुनिया को विद्या, कला और ज्ञान का मार्ग दिखाया। आर्यों का जीवन परोपकार, त्याग और उच्च आदर्शों से भरा हुआ था। वे कभी स्वार्थी नहीं थे और सदैव दूसरों के भले के लिए कार्य करते थे। यद्यपि आज भारतवासी अपनी पुरानी गरिमा खोकर अधोगति (कठिन स्थिति) में जी रहे हैं, फिर भी उनके भीतर अपने पूर्वजों के महान संस्कारों और उच्चता के चिह्न आज भी दिखाई देते हैं।

સાચો જવાબ:

(1) भारत को (क) ऋषिभूमि कहा गया है।



(2) वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का (ग) सिरमौर है।



(3) विधि ने (क) नरसृष्टि का विस्तार यहीं से किया है।



(4) भारत के निवासी (ख) आर्य हैं।



(5) आर्यों की संतानों की आज (क) अधोगति हो गई है।


સાચો જવાબ:

(1) वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का → (3) सिरमौर है।





  • पूरा वाक्य: वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है।





(2) विद्या कला कौशल के → (6) प्रथम आचार्य आर्य हैं।





  • पूरा वाक्य: विद्या कला कौशल के प्रथम आचार्य आर्य हैं।





(3) सम्पूर्ण देशों से अधिक भारत का → (1) उत्कर्ष है।





  • पूरा वाक्य: सम्पूर्ण देशों से अधिक भारत का उत्कर्ष है।





(4) भगवान की भव-भूति का → (2) प्रथम भंडार है।





  • पूरा वाक्य: भगवान की भव-भूति का प्रथम भंडार है।





(5) भारत जैसा पुरातन देश → (4) दुनिया में कोई दूसरा नहीं है।





  • पूरा वाक्य: भारत जैसा पुरातन देश दुनिया में कोई दूसरा नहीं है।





(6) भारत के निवासी → (5) आर्य हैं।





  • पूरा वाक्य: भारत के निवासी आर्य हैं।




સાચો જવાબ:

(1) "वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है।"





  • भावार्थ: इस पंक्ति का भाव यह है कि भारत विश्व का सबसे प्राचीन देश है। जिस प्रकार परिवार में बुजुर्गों का स्थान सबसे ऊँचा और आदरणीय होता है, उसी प्रकार समस्त देशों के बीच भारत का स्थान मुकुट (सिरमौर) के समान सर्वोच्च और गौरवशाली है। भारत ने ही संसार को सभ्यता और संस्कृति का पाठ पढ़ाया है।





(2) "भगवान की भव-भूतियों का यह प्रथम भण्डार है।"





  • भावार्थ: इस पंक्ति का भाव यह है कि ईश्वर ने इस संसार में सुख, समृद्धि, प्राकृतिक सौंदर्य और ज्ञान रूपी जितने भी वैभव (भव-भूतियाँ) बनाए हैं, उन सबका सबसे पहला भंडार भारत भूमि को ही बनाया है। भारत से ही संपूर्ण विश्व में भौतिक और आध्यात्मिक संपदा का विकास हुआ है।




સાચો જવાબ:


  • अधोगति × उन्नति (ऊर्ध्वगति)




  • वृद्ध × युवा (बाल)




  • पुरातन × नूतन (नवीन)




  • प्रथम × अंतिम




  • विस्तार × संकोच (संक्षेप)




  • पुण्यभूमि × पापभूमि




  • उत्कर्ष × अपकर्ष




  • उच्च × निम्न




સાચો જવાબ:


  • हिमालय – नगराज, हिमगिरि




  • गंगा – भागीरथी, सुरसरि




  • गिरि – पर्वत, पहाड़




  • भूमि – धरा, पृथ्वी




  • विश्व – जग, संसार




  • मदिरा – शराब, मद्य




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