chapter 13

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

સાચો જવાબ: रहीम के अनुसार सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति का संचय स्वयं के उपयोग के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के भले (परोपकार) के लिए करते हैं।

સાચો જવાબ: छोटों का तिरस्कार इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि जहाँ छोटी वस्तु काम आती है, वहाँ बड़ी वस्तु काम नहीं आ सकती।

સાચો જવાબ: सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।

સાચો જવાબ: उत्तम प्रवृत्ति (स्वभाव) के व्यक्ति पर बुरी संगति (कुसंग) का कोई असर नहीं पड़ता।

સાચો જવાબ: रहीम के अनुसार किसी से भी माँगने नहीं जाना चाहिए, क्योंकि माँगना मृत्यु के समान माना गया है।

સાચો જવાબ: रहीम कहते हैं कि दूसरों से माँगने जाने वाले लोग तो मृत समान हैं ही, परंतु उनसे भी पहले वे लोग मर चुके हैं जो माँगने पर देने से साफ़ मना (इनकार) कर देते हैं।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए:

સાચો જવાબ: रहीम समझाते हैं कि जिस प्रकार वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर (तालाब) अपना पानी स्वयं नहीं पीते, ठीक उसी प्रकार सज्जन लोग भी धन और संपत्ति का संग्रह अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण और परोपकार के लिए करते हैं।

સાચો જવાબ: रहीम खीरे का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि जिस प्रकार कड़वे खीरे के ऊपरी सिरे को काटकर उस पर नमक मलकर उसकी कड़वाहट की सजा दी जाती है, उसी प्रकार कड़वे और कटु वचन बोलने वाले मनुष्यों को भी ऐसा ही दंड मिलना चाहिए।

સાચો જવાબ: रहीम फटे हुए दूध के उदाहरण से समझाते हैं कि जिस प्रकार एक बार दूध फट जाने पर उसे कितना भी मथा जाए, उससे मक्खन नहीं निकाला जा सकता, ठीक उसी प्रकार एक बार बात बिगड़ जाने पर लाख कोशिशों के बाद भी वह पहले जैसी ठीक नहीं हो पाती।

સાચો જવાબ:

(1) 'रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।'



आशय: इस पंक्ति का अर्थ है कि बड़े या शक्तिशाली लोगों को देखकर छोटे या साधारण लोगों की उपेक्षा (तिरस्कार) नहीं करनी चाहिए। समाज में हर वस्तु और व्यक्ति का अपना महत्त्व होता है; जहाँ सुई की आवश्यकता होती है, वहाँ तलवार कोई काम नहीं आ सकती।



(2) 'चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।'



आशय: इस पंक्ति का अर्थ है कि जो लोग उत्तम और दृढ़ चरित्र वाले होते हैं, उन पर दुष्ट या बुरे लोगों की संगति का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। जिस प्रकार चंदन के पेड़ से विषैले साँप लिपटे रहने पर भी चंदन अपनी शीतलता और सुगंध नहीं छोड़ता तथा उसमें विष नहीं फैलता।










 
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