chapter 14

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक वाक्य में उत्तर दीजिए:

સાચો જવાબ: प्रस्तुत कविता के रचनाकार पंडित नरेन्द्र शर्मा हैं।

સાચો જવાબ: गगन से अंगारे बरस रहे हैं और धरती ज्वालाएँ (लपटें) उगल रही है।

સાચો જવાબ: सातों समंदर उबल (खौल) रहे हैं और उसमें दुनिया डूबती जा रही है।

સાચો જવાબ: 'युग और मैं' का समानार्थी शीर्षक 'काल/ज़माना और स्वयं (अहं)' हो सकता है।
2. संक्षेप में उत्तर लिखिए:

સાચો જવાબ: मनुष्य के हाथ पृथ्वी पर स्वर्ग का निर्माण करने के लिए बने हैं और बुद्धि का कार्य संसार की जड़ता (अज्ञान) को दूर करके जीवन में चेतना और प्राण फूँकना है।

સાચો જવાબ: अज्ञान और विनाश के कारण ज्ञान डूब (ग़र्क हो) रहा है तथा धरती विनाशकारी लपटें उगल रही है, जिससे सर्वत्र तबाही छाई हुई है।

સાચો જવાબ: मानव अपने मूल उद्देश्य (ईश्वरत्व और सृष्टि कल्याण) को भूलकर आत्मघाती बन गया है। वह एक-दूसरे पर विजय पाने और संघर्ष करने में लीन होकर अपने ही वैभव को तहस-नहस कर रहा है।
3. सविस्तार उत्तर दीजिए:

સાચો જવાબ: कवि के हृदय में संपूर्ण विश्व में छाए विनाश, अशांति और हिंसा की गहरी वेदना है। जब अनगिनत बस्तियाँ उजड़ रही हों, मानवता लहूलुहान हो रही हो और मौत सभी को निगल रही हो, ऐसे विकट समय में कवि को अपना व्यक्तिगत दुख-दर्द बहुत छोटा और नगण्य लगता है। कवि पूरे संसार के दुख से दुखी हैं।

સાચો જવાબ: यह कविता संदेश देती है कि मनुष्य को आपसी भेदभाव, स्वार्थ और युद्ध की नीति छोड़कर विश्वबंधुत्व, समता और मानवता की स्थापना करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत दुखों से ऊपर उठकर संपूर्ण समाज और संसार की भलाई के बारे में सोचना चाहिए।
4. संदर्भ सहित स्पष्टीकरण दीजिए:

સાચો જવાબ: कवि कहते हैं कि मनुष्य का लक्ष्य अपने कर्मों से ईश्वरत्व प्राप्त करना और संपूर्ण सृष्टि में शांति स्थापित करना था। परंतु वह इस काम को अधूरा छोड़कर स्वयं का ही विनाश (आत्मघात) करने लगा है। जब मानवता का मूल उद्देश्य ही बहक गया है, तो कवि का अपने लक्ष्य से चूक जाना स्वाभाविक है।

સાચો જવાબ: इस पंक्ति में कवि पीड़ित मानवता के प्रति गहरी करुणा व्यक्त करते हैं। कवि पूछते हैं कि हिंसा से घायल हुई इस मानवता को शांति कब मिलेगी और सबकी समानता के सपने कब सच होंगे? जब पूरी दुनिया पर विपत्ति पड़ी हो, तो कवि का व्यक्तिगत दुख बहुत छोटा है।

સાચો જવાબ:


  • हस्ती × बेहस्ती / अनस्तित्व




  • अंगार × जल / बर्फ




  • समुंदर × मरुस्थल (रेगिस्तान)




સાચો જવાબ:

(1) अनगिनत = असंख्य





  • वाक्य: आकाश में अनगिनत तारे चमक रहे हैं।





(2) गगन = आकाश / आसमान





  • वाक्य: पक्षी गगन में स्वच्छंद उड़ते हैं।





(3) दुनिया = संसार / विश्व





  • वाक्य: यह दुनिया ईश्वर की सुंदर रचना है।





(4) निखिल = संपूर्ण / पूरा





  • वाक्य: निखिल विश्व में शांति होनी चाहिए।





(5) तहस-नहस = नष्ट-भ्रष्ट





  • वाक्य: युद्ध ने पूरे नगर को तहस-नहस कर दिया।





(6) आपा = अहंकार / अभिमान





  • वाक्य: हमें क्रोध में अपना आपा नहीं खोना चाहिए।




સાચો જવાબ:

ऐसी विकट और विनाशकारी स्थिति में:





  1. मैं धैर्य रखकर पीड़ित और असहाय लोगों की सहायता करने का प्रयास करूँगा।




  2. लोगों में फैली भ्रांतियों और नफ़रत को दूर कर शांति और भाईचारे का संदेश दूँ।




  3. अहिंसा और समता का मार्ग अपनाकर समाज में राहत और सुरक्षा का वातावरण बनाने का यथासंभव प्रयास करूँगा।














 
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