chapter 16

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

સાચો જવાબ: प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा केंद्र एक प्रकार के आश्रम अथवा मंदिर के समान थे।

સાચો જવાબ: जब रवीन्द्रनाथ ठाकुर को नोबल पुरस्कार मिला तब बंगाली लोग "अमादेर ठाकुर अमादेर कठोर सुपूत..." (हमारे ठाकुर, हमारे सुपुत्र) का राग आलापने लगे।

સાચો જવાબ: भगवान रामकृष्ण बरसों तक योग्य शिष्य पाने के लिए रो-रोकर प्रार्थना करते थे।

સાચો જવાબ: भगवान ईसा का कथन स्मरणीय है - "मेरे अनुयायी लोग मुझसे कहीं अधिक महान हैं और उनकी जूतियाँ होने की योग्यता भी मुझमें नहीं है।"

સાચો જવાબ: जिनमें स्वयं गांधीजी बनने की क्षमता और शक्ति निहित है, उन्हें गांधीजी अच्छे लगते हैं।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के विस्तार से उत्तर लिखिए:

સાચો જવાબ: यूरोप की व्यावसायिक संस्कृति के प्रभाव के कारण आज गुरु-शिष्य संबंधों का पवित्र रूप बदल गया है। पहले शिक्षा देना एक आध्यात्मिक अनुष्ठान और मंदिर समान सेवा कार्य था, जबकि आज शिक्षण कार्य पैसे कमाने और पेट पालने का जरिया बन गया है। अब शिक्षा क्रय-विक्रय (खरीदने-बेचने) की वस्तु बन गई है और गुरु-शिष्य के संबंध व्यावसायिक हो गए हैं।

સાચો જવાબ: किसी भी देवमंदिर की मूर्ति की शक्ति इस बात पर निर्भर करती है कि पुजारी किस भावना और श्रद्धा से उसकी पूजा-अर्चना करता है। पुजारी की भावपूजा, भक्ति और नैवेद्य भावना जितनी अधिक सच्ची होगी, मूर्ति में उतनी ही शक्ति और दिव्यता विकसित होगी।

સાચો જવાબ: स्वामी विवेकानंद को शुरुआत में भारत में कोई विशेष स्थान नहीं मिला था, परंतु जब उन्होंने अमेरिका में नाम और प्रसिद्धि कमाई, तब भारतवासी उनका स्वागत करने के लिए आगे आए। उसी प्रकार, रवीन्द्रनाथ ठाकुर को भी जब विदेशों में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तब भारत के लोगों ने उन्हें महत्त्व देना और उनकी प्रशंसा करना शुरू किया।
3. आशय स्पष्ट कीजिए:

સાચો જવાબ: आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि किसी वस्तु या व्यक्ति की महानता स्वयं उसमें नहीं, बल्कि उसे परखने वाले की दृष्टि में होती है। जैसे पुष्प की सुंदरता देखने वाले की दृष्टि में होती है, वैसे ही सम्मान देने वाला व्यक्ति अपने उच्च विचारों और श्रद्धा के कारण सम्मान पाने वाले व्यक्ति से अधिक महान होता है।

સાચો જવાબ: आशय: गुरु द्वारा दी जाने वाली डाँट या दंड शिष्य के हित के लिए ही होता है। गुरु शिष्य की कमियों और बुराइयों को तराश कर उसे योग्य बनाते हैं। जो शिष्य गुरु के अनुशासन और दंड को सहकर सीखता है, वह जीवन में सही राह पर चलकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।

સાચો જવાબ:

(1) इसमें और मुझमें फ़रक ही कुछ नहीं है। (भविष्यकाल)



उत्तर: इसमें और मुझमें फ़रक ही कुछ नहीं रहेगा।



(2) हम अपने शिष्यों से कम प्रमुख रहें। (पूर्ण भूतकाल)



उत्तर: हम अपने शिष्यों से कम प्रमुख रहे थे।



(3) उपनिषदों में आचार्यों ने कहा है। (सामान्य भूतकाल)



उत्तर: उपनिषदों में आचार्यों ने कहा।


સાચો જવાબ:

(1) ताकते रहना = आश्चर्य से देखते रहना





  • वाक्य: जादूगर के अनोखे खेल को बच्चे टकटकी लगाकर ताकते रहे।





(2) पसीने की कमाई = कठिन परिश्रम का फल





  • वाक्य: ईमानदारी की पसीने की कमाई में ही सच्चा सुख मिलता है।





(3) रंग जाना = किसी काम या भाव में लीन होना





  • वाक्य: होली के अवसर पर सभी लोग भक्ति और उत्सव के रंग में रंग गए।




સાચો જવાબ:


  • रोगी × निरोगी / स्वस्थ




  • असहाय × सहाय / सशक्त




  • वृद्ध × युवा / बालक




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