સાચો જવાબ:
तुलसीदास के मत से भगवान श्रीराम ही पतितपावन (पापियों का उद्धार करने वाले) हैं।
સાચો જવાબ:
भगवान को अति दीन (दीन-दुखी और असहाय) अत्यंत प्रिय लगते हैं।
સાચો જવાબ:
भगवान ने हठ करके दुष्टों, पक्षी (जटायु), पशु (मृग/मारीच), शिकारी (व्याध/वाल्मीकि), पत्थर (अहल्या) और वृक्ष (यमलार्जुन) का उद्धार किया।
સાચો જવાબ:
देव, दानव, मुनि, नाग और मनुष्य - ये सभी माया के वश में होकर विवश रहते हैं
સાચો જવાબ:
प्रभु दानी हैं, तो कवि तुलसीदास उनके द्वार के भिखारी हैं।
સાચો જવાબ:
कवि पापों के समूह का नाश करने वाला (पाप पुंजहारी) भगवान श्री राम को कहते हैं।
2. विस्तार सहित उत्तर लिखिए:
સાચો જવાબ:
तुलसीदासजी कहते हैं कि केवल श्री राम ही पतितों का उद्धार करने वाले और दीनों से प्रेम करने वाले हैं। उन्होंने पक्षी (जटायु), पशु (मृग), शिकारी (वाल्मीकि), पत्थर (अहल्या) और वृक्षों तक का उद्धार किया है। अन्य देवी-देवता, मुनि और मनुष्य स्वयं माया के वशीभूत हैं, इसलिए उनसे किसी सहायता की आशा करना व्यर्थ है। यही कारण है कि तुलसीदासजी प्रभु राम के चरणों को छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते।
સાચો જવાબ:
तुलसीदास ने स्वयं को दीन और भगवान को दयालु, स्वयं को भिखारी और भगवान को दानी, स्वयं को पापी और भगवान को पापहारी, तथा स्वयं को अनाथ और भगवान को अनाथों का नाथ माना है। इसके अलावा उन्होंने भगवान को स्वामी, पिता, माता, गुरु और मित्र के रूप में स्वीकार किया है। वे प्रभु की किसी न किसी रूप में शरण प्राप्त कर उनके चरणों में बने रहना चाहते हैं।
સાચો જવાબ:
इस पंक्ति का भाव यह है कि भक्त तुलसीदास और भगवान के बीच कई तरह के रिश्ते हैं - जैसे स्वामी-सेवक, माता-पिता-पुत्र या गुरु-शिष्य का रिश्ता। भगवान को इनमें से जो भी संबंध पसंद हो, वे स्वीकार कर लें, तुलसीदास का मुख्य उद्देश्य केवल भगवान के चरणों में शरण प्राप्त करना है।
3. भावार्थ स्पष्ट कीजिए:
સાચો જવાબ:भावार्थ: इस पंक्ति में तुलसीदास कहते हैं कि देवता, राक्षस, मुनि, नाग और मनुष्य - ये सभी ईश्वर की माया के वशीभूत हैं। जो स्वयं माया के चक्कर में विवश हैं, उनसे किसी प्रकार की मुक्ति की उम्मीद रखना व्यर्थ है। इसलिए तुलसीदास अपना सर्वस्व इन मायाबद्ध जीवों को न सौंपकर केवल मायापति प्रभु राम को ही सौंपते हैं।
સાચો જવાબ:भावार्थ: कवि कहते हैं कि हे हे प्रभु! आप असहायों के नाथ हैं और मेरे जैसा असहाय कोई दूसरा नहीं है। संसार में मेरे समान कोई दुःखी नहीं है और आपके समान दुखों को हरने वाला कोई दूसरा नहीं है। इसलिए आप मेरे दुखों को दूर कर मुझे शरण में लीजिए।
સાચો જવાબ:
अधम = पापी / नीच
दनुज = राक्षस / असुर
मनुज = मनुष्य / मानव
पातकी = महापापी
आरत = दुःखी / पीड़ित
चेरो = दास / सेवक
સાચો જવાબ:
(1) पापियों का उद्धार करनेवाला ईश्वर — पतितपावन
(2) जिसकी रक्षा करनेवाला कोई न हो — अनाथ
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