chapter 18

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-दो वाक्यों में उत्तर लिखिए:

સાચો જવાબ: नगर की असलियत (जहाँ सब चीज़ें टके सेर मिलती थीं) जानने पर महंत ने तुरंत उस नगर को छोड़कर चले जाने का फ़ैसला लिया।

સાચો જવાબ: अंधेरी नगरी में भाजी और खाजा दोनों 'टके सेर' के भाव से बिकते थे।

સાચો જવાબ: कसाई ने भेड़ गड़रिए से टके में मोल ली थी।

સાચો જવાબ: महंत ने गोवर्धनदास को उस अविवेकी नगरी को छोड़कर तुरंत साथ चलने की सलाह दी और कहा कि ऐसी नगरी में रहना विपत्ति को बुलाना है।

સાચો જવાબ: महंत ने कहा कि उस शुभ घड़ी में जो भी फाँसी पर चढ़ेगा, वह सीधा स्वर्ग जाएगा। यह सुनकर मूर्ख राजा स्वयं स्वर्ग जाने के लालच में फाँसी चढ़ने को तैयार हो गया।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर लिखिए:

સાચો જવાબ: उत्तर: गोवर्धनदास बहुत लालची स्वभाव का था। जब उसने देखा कि अंधेरी नगरी में भाजी, खाजा, मिठाई आदि सभी वस्तुएँ एक ही भाव (टके सेर) में मिल रही हैं, तो वह बहुत प्रसन्न हुआ। उसने सोचा कि अन्य स्थानों पर दिन-भर माँगने पर भी पेट नहीं भरता, जबकि यहाँ कम पैसों में भरपेट मिठाई और स्वादिष्ट भोजन मिल सकता है। इसी स्वाद और लालच के कारण उसने गुरुजी की सलाह न मानकर वहीं रहने का फैसला लिया।

સાચો જવાબ: बकरी की मौत के लिए क्रमबद्ध रूप से कल्लू बनिया, कारीगर, चूनेवाला, भिश्ती, कसाई, गड़रिया और अंत में कोतवाल को अपराधी ठहराया गया। राजा ने कोतवाल को फाँसी चढ़ाने का हुक्म दिया क्योंकि उसकी धूमधाम से निकली सवारी के कारण गड़रिए ने घबराकर बड़ी भेड़ बेची और कसाई ने बड़ी मशक बनाई, जिससे चूने में पानी ज्यादा हो गया और दीवार गिर गई। परंतु फाँसी का फंदा बड़ा होने और कोतवाल के दुबला होने के कारण राजा ने न्याय का नियम बनाए रखने के लिए किसी भी 'मोटे आदमी' (गोवर्धनदास) को फाँसी देने का फैसला किया।

સાચો જવાબ: गोवर्धनदास गुरु की चेतावनी को अनदेखा कर अंधेरी नगरी में रहकर मिठाई खाता रहा और मोटा हो गया। जब दुबले कोतवाल के गले में फाँसी का फंदा बड़ा पड़ा, तो सिपाहियों ने किसी मोटे आदमी को फाँसी देने के लिए गोवर्धनदास को बेकसूर ही पकड़ लिया। जब उसे बिना किसी अपराध के मृत्युदंड मिलने वाला था, तब उसे अपने गुरुजी की बात न मानने की भूल का अहसास हुआ और उस पर पछताने की बारी आई।

સાચો જવાબ: महंतजी ने अपनी बुद्धिमत्ता से एक चाल चली। उन्होंने अपने शिष्य के कान में कुछ कहा और फिर दोनों आपस में पहले फाँसी चढ़ने के लिए बहस करने लगे। राजा द्वारा कारण पूछने पर महंत ने कहा कि इस शुभ घड़ी में फाँसी चढ़ने वाला सीधा स्वर्ग जाएगा। स्वर्ग जाने की होड़ में मंत्री, कोतवाल और अंत में मूर्ख राजा खुद सबसे पहले फाँसी चढ़ने की ज़िद करने लगा। इस प्रकार महंत ने राजा की मूर्खता का फायदा उठाकर अपने शिष्य गोवर्धनदास की जान बचा ली।

સાચો જવાબ: 'अंधेर नगरी' का अर्थ है ऐसा स्थान जहाँ अज्ञान, अव्यवस्था, अन्याय और विवेकहीनता का अंधकार हो। इस एकांकी में राजा अत्यंत मूर्ख और अविवेकी है, जहाँ टके सेर भाजी और टके सेर खाजा बिकता है तथा न्याय के नाम पर बेकसूरों को फाँसी की सजा दी जाती है। जहाँ सही-गलत और गुणी-अवगुणी का कोई भेद न हो, ऐसे राज्य के लिए 'अंधेर नगरी' शीर्षक पूर्णतः सार्थक और उपयुक्त है।
3. आशय स्पष्ट कीजिए:

સાચો જવાબ: आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि जहाँ का राजा विवेकहीन और मूर्ख होता है, वहाँ के राज्य में सर्वत्र अव्यवस्था और अन्याय फैल जाता है। ऐसे राज्य में अच्छी-बुरी, मूल्यवान और सस्ती सभी वस्तुओं को एक ही तराजू में तौला जाता है, जिससे समाज का विनाश निश्चित होता है।

સાચો જવાબ: आशय: इस पंक्ति में राजा के परम अज्ञान और अंध-मूर्खता का पता चलता है। जब महंतजी झूठी बात गढ़ते हैं कि उस घड़ी फाँसी चढ़ने वाला सीधा स्वर्ग जाएगा, तो राजा बिना सोचे-समझे अपने अहम् और लालच में आकर कहता है कि राजा के रहते कोई और स्वर्ग नहीं जा सकता। यह कथन राजा के विवेकहीन चरित्र पर करारा व्यंग्य करता है।

સાચો જવાબ:

(1) महंत अंधेरी नगरी में क्षणभर रहना नहीं चाहते?



(2) मंत्री और नौकर लोग यथास्थान बैठे हैं।



(3) कोतवाल तूने सवारी धूमधाम से क्यों निकाली?



(4) मुझे अपने शिष्य को अंतिम उपदेश देने दो।



(5) शुभघड़ी में जो मरा, सीधा स्वर्ग जाएगा।


સાચો જવાબ:

(1) न्याय माँगनेवाला — फ़रियादी



(2) तरकारी बेचनेवाली स्त्री — कुँजड़िन



(3) चमड़े की खाल का बड़ा थैला — मशक



(4) भेड़-बकरे चरानेवाला — गड़रिया



(5) मिठाई बेचनेवाला — हलवाई


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