chapter 2

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए।

સાચો જવાબ: संध्या के समय एक परदेशी नवयुवक ने रात काटने के लिए स्थान माँगा, इसलिए अतिथि-सत्कार की भावना से शिशुपाल ने अपने घर का दरवाजा खोल दिया।

સાચો જવાબ: शिशुपाल यह साबित करने के लिए सच्चा न्याय दिखाने के अवसर की तलाश में था कि अवसर मिलने पर न्याय किसे कहते हैं।

સાચો જવાબ: शिशुपाल का विचार था कि न्याय ऐसा होना चाहिए जहाँ न कोई राजा देखा जाए न रंक, और कोई भी अपराधी दंड से न बच सके।

સાચો જવાબ: परदेशी स्वयं सम्राट अशोक थे; उन्होंने दूसरे दिन सुबह उठकर शिशुपाल को धन्यवाद देकर उनसे विदा ली।

સાચો જવાબ: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को न्यायमंत्री के पद पर नियुक्त करने की पहचान और प्रतीक के रूप में अपनी राजमुद्रा दी।

સાચો જવાબ: शिशुपाल के न्यायमंत्री बनते ही राज्य की सुव्यवस्था इतनी अच्छी हो गई कि चारों तरफ पूरी शांति छा गई और लोग घरों के दरवाजे तक खुले छोड़ने लगे।

સાચો જવાબ: पहरेदार की हत्या होने पर शिशुपाल की नींद उड़ गई और उन्होंने खाना-पीना छोड़कर अपराधी का पता लगाने के लिए रात-दिन एक कर दिया।

સાચો જવાબ: अपराधी स्वयं सम्राट अशोक हैं यह पता चलने पर शिशुपाल ने साहसपूर्वक दरबार में सम्राट अशोक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
2. विस्तार से उत्तर दीजिए :

સાચો જવાબ: सम्राट अशोक ने भेष बदलकर एक परदेशी के रूप में शिशुपाल के घर रात बिताई। वहाँ उन्होंने न्याय को लेकर शिशुपाल के विचार सुने और उनके साहस को परखा। बाद में, दरबार में बुलाकर उन्हें न्यायमंत्री का पद देकर और एक पहरेदार की हत्या के मामले में स्वयं को अपराधी के रूप में प्रस्तुत कर शिशुपाल के निष्पक्ष न्याय की अंतिम परीक्षा ली। इस प्रकार उन्होंने एक सच्चे न्यायमंत्री की खोज की।

સાચો જવાબ: सम्राट अशोक ने न्यायमंत्री का पद देते हुए शिशुपाल को अपने हाथ से अँगूठी उतारकर पहना दी, जो कि सम्राट अशोक की राजमुद्रा (राजकीय पहचान) थी।

સાચો જવાબ: जब शिशुपाल ने बिना किसी डर या पक्षपात के स्वयं सम्राट को पहरेदार की हत्या का दोषी मानकर मृत्युदंड का निर्भीक निर्णय सुनाया, तब शिशुपाल की ऐसी निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा देखकर सम्राट अशोक का हृदय गद्गद हो गया।

સાચો જવાબ: न्यायमंत्री ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि राजा को ईश्वर का रूप माना गया है, इसलिए उसे केवल ईश्वर ही दंड दे सकता है। उन्होंने न्याय की मर्यादा रखने के लिए सम्राट अशोक के स्थान पर उनकी सोने की मूर्ति को फाँसी पर लटकाने की आज्ञा दी और सम्राट को चेतावनी देकर छोड़ दिया। इस तरह उनके जीवन की रक्षा भी हुई और न्याय भी हुआ।

સાચો જવાબ: जब शिशुपाल ने अपनी राजमुद्रा वापस सौंपनी चाही, तब सम्राट अशोक ने सम्मानभरी दृष्टि से देखते हुए कहा कि उनकी आँखें खुल गई हैं और यह भारी बोझ शिशुपाल के अतिरिक्त और कोई नहीं उठा सकता। सम्राट के इस अगाध विश्वास और आग्रह के आगे न्यायमंत्री निरुत्तर हो गए।
3. निम्नलिखित विधान कौन कहता है ? क्यों ?

સાચો જવાબ:


  • कौन कहता है: यह वाक्य ब्राह्मण शिशुपाल अपने द्वार पर आए परदेशी (अशोक) से कहते हैं।




  • क्यों: क्योंकि भारतीय संस्कृति में अतिथि को भगवान का रूप माना जाता है, और उनके आने से शिशुपाल अपने घर को धन्य समझ रहे थे।




સાચો જવાબ:


  • कौन कहता है: यह वाक्य परदेशी (सम्राट अशोक) शिशुपाल से कहता है।




  • क्यों: जब शिशुपाल देश में हो रहे अन्याय की शिकायत कर रहे थे, तब परदेशी उन्हें यह समझाना चाहता था कि केवल बातें करना आसान है पर व्यवस्था सुधारना कठिन होता है।




સાચો જવાબ:


  • कौन कहता है: यह वाक्य शिशुपाल परदेशी से कहते हैं।




  • क्यों: क्योंकि वे परदेशी की चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी योग्यता और न्याय व्यवस्था को सुधारने के अपने दृढ़ संकल्प को प्रकट करना चाहते थे।




સાચો જવાબ:


  • कौन कहता है: यह वाक्य न्यायमंत्री (शिशुपाल) सम्राट अशोक से कहते हैं।




  • क्यों: क्योंकि पहरेदार की हत्या के मामले में सारे सबूत सम्राट के खिलाफ थे और न्यायमंत्री अदालत की कार्यवाही के तहत अपराधी से उसका बयान ले रहे थे।




સાચો જવાબ:


  • कौन कहता है: यह वाक्य शिशुपाल सम्राट अशोक से कहते हैं।




  • क्यों: क्योंकि सम्राट को दंडित करने की विकट और तनावपूर्ण परिस्थिति के बाद उन्हें लगा कि न्यायमंत्री पद की यह जिम्मेदारी बहुत भारी और कठिन है।




સાચો જવાબ:


  • परदेशी × स्वदेशी




  • आदर × अनादर




  • अपराधी × निरपराधी / बेकसूर




  • सुप्रबंध × कुप्रबंध




  • गिरफ़्तार × रिहा / मुक्त




  • स्वीकार × अस्वीकार




સાચો જવાબ:


  • अतिथि = मेहमान




  • सुगम = सरल / आसान




  • कठिन = मुश्किल / दुर्गम




  • हैरान = आश्चर्यचकित / चकित




  • निःस्तब्धता = सन्नाटा / शांति




  • निरुत्तर = मौन / जिसके पास कोई उत्तर न हो




6. सोचकर बताइए :

સાચો જવાબ: अगर मैं न्यायमंत्री होता, तो शिशुपाल की तरह ही पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और बिना किसी भय के न्याय करता। कानून के सामने राजा और रंक को एक समान समझकर समाज में न्याय व्यवस्था की साख मजबूत बनाए रखता।

સાચો જવાબ: सम्राट अशोक की आँखें शिशुपाल के निर्भीक और निष्पक्ष न्याय को देखकर खुलीं। उन्होंने देखा कि शिशुपाल ने सम्राट के वैभव और शक्ति के आगे घुटने नहीं टेके और राज्य के एक साधारण पहरेदार की हत्या के लिए स्वयं राजा को भी कटघरे में खड़ा कर दिया।

સાચો જવાબ: क्योंकि सम्राट अशोक जानते थे कि किसी शक्तिशाली राजा को उसके ही दरबार में मृत्युदंड सुनाने के लिए असाधारण साहस और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा की आवश्यकता होती है। शिशुपाल ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा, इसी साहस की सम्राट ने प्रशंसा की।

સાચો જવાબ: સાચો વિકલ્પ: (D) (ड) यह तुम्हारे न्यायमंत्री होने की पहचान
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