ધોરણ 9 | విષય: Hindi
कौन कहता है: यह वाक्य ब्राह्मण शिशुपाल अपने द्वार पर आए परदेशी (अशोक) से कहते हैं।
क्यों: क्योंकि भारतीय संस्कृति में अतिथि को भगवान का रूप माना जाता है, और उनके आने से शिशुपाल अपने घर को धन्य समझ रहे थे।
कौन कहता है: यह वाक्य परदेशी (सम्राट अशोक) शिशुपाल से कहता है।
क्यों: जब शिशुपाल देश में हो रहे अन्याय की शिकायत कर रहे थे, तब परदेशी उन्हें यह समझाना चाहता था कि केवल बातें करना आसान है पर व्यवस्था सुधारना कठिन होता है।
कौन कहता है: यह वाक्य शिशुपाल परदेशी से कहते हैं।
क्यों: क्योंकि वे परदेशी की चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी योग्यता और न्याय व्यवस्था को सुधारने के अपने दृढ़ संकल्प को प्रकट करना चाहते थे।
कौन कहता है: यह वाक्य न्यायमंत्री (शिशुपाल) सम्राट अशोक से कहते हैं।
क्यों: क्योंकि पहरेदार की हत्या के मामले में सारे सबूत सम्राट के खिलाफ थे और न्यायमंत्री अदालत की कार्यवाही के तहत अपराधी से उसका बयान ले रहे थे।
कौन कहता है: यह वाक्य शिशुपाल सम्राट अशोक से कहते हैं।
क्यों: क्योंकि सम्राट को दंडित करने की विकट और तनावपूर्ण परिस्थिति के बाद उन्हें लगा कि न्यायमंत्री पद की यह जिम्मेदारी बहुत भारी और कठिन है।
परदेशी × स्वदेशी
आदर × अनादर
अपराधी × निरपराधी / बेकसूर
सुप्रबंध × कुप्रबंध
गिरफ़्तार × रिहा / मुक्त
स्वीकार × अस्वीकार
अतिथि = मेहमान
सुगम = सरल / आसान
कठिन = मुश्किल / दुर्गम
हैरान = आश्चर्यचकित / चकित
निःस्तब्धता = सन्नाटा / शांति
निरुत्तर = मौन / जिसके पास कोई उत्तर न हो