ધોરણ 9 | విષય: Hindi
भावार्थ: कवि मनुष्य की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि हे मनुष्य! तुम्हारे पास बृहद् गुरु जैसी कुशाग्र बुद्धि है और तुम्हारी चाल में पवन जैसी तीव्रता है। तुम्हारी सोच, विचार और उपलब्धियों की उड़ान आकाश से भी अधिक ऊँची है।
(2) धरती की शान, तू भारत की संतान, तेरी मुट्ठियों में बंद तूफान है रे।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि हे भारत के वीर पुत्र! तुम इस संपूर्ण धरती का गौरव हो। तुम्हारी मुट्ठियों में तूफानों को भी वश में करने की असीम शक्ति छिपी हुई है, अर्थात् तुम किसी भी बड़ी चुनौती को परास्त कर सकते हो।
भूचाल = भूकंप / चालन
हिमगिरि = हिमालय / पर्वतराज
वाणी = बोली / वचन
तूफान = अंधड़ / चक्रवात
अमृत = सुधा / सोम
धीर = धैर्यवान / गंभीर
हिम्मत = साहस / वीरता
नभ = आकाश / गगन
निज = अपना / स्वयं
अमृत × विष
अम्बर × धारा / अवनि / धरती
अमर × मर्त्य
धीर × अधीर
वीर × कायर
पाप × पुण्य
जीवन × मरण / मृत्यु
(1)
धरती की शान तू भारत की संतान,
तेरी मुट्ठियों में बंद तूफान है रे,
मनुष्य तू बड़ा महान है ।
(2)
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे,
तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड़ दे,
अमर तेरे प्राण, मिला तुझको वरदान
तेरी आत्मा में स्वयं भगवान है रे ॥
नयनों में ज्वाल, तेरी गति में भूचाल,
तेरी छाती में छिपा महाकाल है,
पृथ्वी के लाल तेरा हिमगिरि-सा भाल,
तेरी भृकुटी में तांडव का ताल है,
निज को तू जान जरा शक्ति पहचान
तेरी वाणी में युग का आह्वान है रे ॥
धरती-सा धीर, तू है अग्नि-सा वीर,
तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले,
पापों का प्रलय रुके, पशुता का शीश झुके,
तू जो अगर हिम्मत से काम ले,
गुरु-सा मतिमान, पवन-सा तू गतिमान,
तेरी नभ से भी ऊँची उड़ान है रे ।