chapter 24

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. एक वाक्य में उत्तर दीजिए:

સાચો જવાબ: मृग कस्तूरी की सुगंध पाकर उसे जंगल (वन) में ढूँढ़ता है, जबकि वह उसकी अपनी नाभि में ही होती है।

સાચો જવાબ: हमारा जन्म कृतार्थ करने के लिए हमें संतों (सज्जनों) की सेवा करनी चाहिए।

સાચો જવાબ: भवसागर तरने (संसार में सार्थक जीवन जीने) के लिए पाँच तत्त्व हैं — साधु-मिलन (सज्जनों की संगति), हरिभजन (ईश्वर भक्ति), दया, दीनाता (नम्रता) और उपकार (दूसरों का भला करना)।
2. निम्नलिखित भावार्थ वाले दोहे ढूँढ़कर उनका गान कीजिए:

સાચો જવાબ:

कस्तूरी कुंडली बसै, मृग ढूँढे बन माहिं।



ऐसे घट-घट राम है, दुनिया देखे नाहिं॥


સાચો જવાબ:

मेरा मुझमें कछु नहीं, जो कछु है सो तेरा।



तेरा तुझको सौंपते, क्या लागेगा मेरा॥


સાચો જવાબ:

एहरन की चोरी करे, करे सूई का दान।



ऊँचे चढ़कर देखते, कैतिक दूर विमान॥


સાચો જવાબ:

रुखा सूखा खाई कै, ठण्डा पानी पीव।



देख पराई चूपड़ी, मत ललचावै जीव॥


3. निम्नलिखित दोहों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए:

સાચો જવાબ:

सेवा कीजे संत की, तो जनम कृतार्थ सोय॥





  • भावार्थ: कबीरदास जी कहते हैं कि संतों और सज्जन पुरुषों से मिलने पर मन में परम आनंद और सुख की प्राप्ति होती है, जबकि दुष्टों के मिलने पर केवल दुःख ही मिलता है। इसलिए मनुष्य को हमेशा संतों की सेवा और संगति करनी चाहिए, जिससे उसका जीवन सफल (कृतार्थ) हो जाए।




સાચો જવાબ:


  • भावार्थ: कबीरदास जी कहते हैं कि सज्जन, साधु पुरुष और सोना - ये यदि सौ बार भी रूठें या टूटें, तो पुन: जुड़ जाते हैं (सज्जन संबंध निभा लेते हैं)। परंतु दुर्जन मनुष्य कुम्हार के मिट्टी के घड़े के समान होते हैं, जो एक ही धक्के (जरा-सी अनबन) में सदा के लिए टूट जाते हैं।




સાચો જવાબ:


  • भावार्थ: इस दोहे में कबीरजी ने धार्मिक बाह्याडंबर और दिखावे पर तीखा व्यंग्य किया है। वे कहते हैं कि कंकड़-पत्थर जोड़कर मस्जिद बना ली गई है और उस पर चढ़कर मुल्ला चिल्ला-चिल्लाकर अज़ान (बाँग) देता है। क्या ईश्वर बहरा हो गया है जो उसे पुकारने के लिए इतने शोर की आवश्यकता है? ईश्वर तो अंतर्यामी है।




સાચો જવાબ:


  • भावार्थ: कबीरदास जी कहते हैं कि दुःख आने पर तो हर कोई ईश्वर को याद (स्मरण) करता है, परंतु सुख में कोई भी ईश्वर को याद नहीं करता। यदि मनुष्य सुख के समय भी ईश्वर को याद रखे, तो उसके जीवन में कभी दुःख आएगा ही नहीं।




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