chapter 6

ધોરણ 9 | విષય: Hindi

1. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए

સાચો જવાબ: सामान्यतः लेखक को जुकाम, बुखार, खाँसी और सिरदर्द जैसी छोटी-मोटी बीमारियाँ रहती थीं।

સાચો જવાબ: : लेखक एलोपैथी का उपचार इसलिए नहीं कराते थे क्योंकि उसका इलाज बहुत महँगा था और वह उनके वित्तीय बूते (बजट) के बाहर था।

સાચો જવાબ: बच्चनजी को मुक्ता प्रसादजी ने लुई कूने के पानी के इलाज (प्राकृतिक चिकित्सा / सिट्ज बाथ) का उपचार बताया था।
2. सविस्तर उत्तर दीजिए

સાચો જવાબ: लेखक का मानना था कि बीमारी अमीरों की 'हरमजदगी' (विलासिता) है और गरीबों को बीमार पड़ने का कोई अधिकार नहीं है। वे परिश्रम करके अपनी आजीविका चलाते थे, इसलिए बीमारी में भी ट्यूशन पढ़ाने और स्कूल जाने से पीछे नहीं हटते थे। इसके अलावा, बुखार में काम करने से उनका विचार-प्रवाह तेज़ हो जाता था तथा सिर पर चढ़े कर्ज़ को चुकाने और परिवार के भरण-पोषण के लिए काम करना उनकी मजबूरी थी। वे मानते थे कि "काम के पीछे बुखार भागता है।"

સાચો જવાબ: जब श्यामा ने डॉक्टर मुखर्जी के नुस्खे और लेखक की टी.बी. (क्षय रोग) की गंभीर बीमारी के बारे में सुना, तो वह भय से काँप उठी। लेकिन उसने तुरंत ही पल भर में यह अनुभव कर लिया कि उसका काँपना और घबराना देखकर लेखक टूट जाएँगे तथा उनकी स्थिति और बिगड़ जाएगी। अपने पति को मानसिक बल देने और चिंतामुक्त रखने के लिए उसने अपने दुःख को छिपाया और तुरंत संभलकर दृढ़ बन गई।

સાચો જવાબ: : जब श्यामा ने लेखक से कहा कि "क़र्ज़ तो मैं आपके मरने के बाद भी उतार दूँगी, आप इसकी चिंता छोड़ो", तो लेखक चौंक पड़े। उन्हें लगा कि यदि वे मर गए तो सारा कर्ज़ और विपत्ति श्यामा के सिर पर आ जाएगी। उन्होंने जीवन भर श्यामा के लिए कुछ नहीं किया था, इसलिए उसे कर्ज़ और अकेलापन सौंपकर मर जाना बहुत बड़ा अपराध होता। इस जघन्य अपराध से बचने और श्यामा को दुःखों से बचाने के लिए लेखक को लगा कि उन्हें श्यामा के लिए जीने का संघर्ष करना चाहिए।

સાચો જવાબ: बच्चनजी का परिवार अत्यधिक आर्थिक तंगी और कंगाली के दौर से गुज़र रहा था। घर का खर्च चलाने के लिए वे स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ रात में ट्यूशन भी लेते थे। किताबों की बिक्री अनियमित थी और उन पर मित्रों तथा ट्रैक्ट सोसाइटी का भारी कर्ज़ चढ़ा हुआ था। बीमारी के समय महँगी एलोपैथी दवाइयाँ खरीदने के पैसे भी उनके पास नहीं थे। डॉक्टर की फीस चुकाने में ही उनका बटुआ खाली हो गया था। उनके पिता अपना घर बेचकर इलाज कराने को तैयार थे, जिससे पता चलता है कि उनकी आर्थिक स्थिति कितनी दयनीय थी।

સાચો જવાબ:

(1) "बीमारी अमीरों की हरमजदगी है, गरीबों को उसे अपने पीछे न लगाना चाहिए।"



भावार्थ: इस पंक्ति का आशय यह है कि बीमार पड़कर आराम करना केवल धनवान लोगों के बस की बात है, क्योंकि उनके पास धन होता है। गरीब और मेहनत-मज़दूरी करने वाले व्यक्ति के पास बीमार होने या आराम करने की गुंजाइश नहीं होती, क्योंकि यदि वे काम पर नहीं जाएँगे तो उनका परिवार भूखा मर जाएगा। इसलिए गरीबों को बीमारी से दूर रहकर काम करते रहना चाहिए।



(2) "काम के पीछे बुखार भागे।"



भावार्थ: इस पंक्ति का आशय यह है कि बीमारी या बुखार के सामने घुटने टेककर खाट पर लेटने के बजाय यदि मनुष्य दृढ़ इच्छाशक्ति से अपना काम करता रहे, तो बीमारी अपने-आप दूर भाग जाती है। लेखक का मानना था कि अपने मनोबल और काम में व्यस्तता के बल पर बुखार पर विजय प्राप्त की जा सकती है।


સાચો જવાબ:

(1) जहाँ शरण लिया जा सके: शरणस्थल



(2) सौ बरस जीने का आशीर्वाद: शतायु / दीर्घायु



(3) शुभ मार्ग पर चलने का आशीर्वाद: स्वस्ति पंथा


સાચો જવાબ:


  • चिकना × खुरदरा (रूखा)




  • मधु × विष (कटु)




  • कलश × (पाठ संदर्भ में अशुद्ध मुद्रण संभव; सामान्यतः कलंक × निष्कलंक)




  • विमुक्त × बद्ध (आबद्ध / गृहीत)




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